• बुरा मान गयी!

    हम ने जुर्रत जो दिखाई तो बुरा मान गयी;

    हद हर एक मिटाई तो बुरा मान गयी;

    खुद ही कहती थी कोई तालुक ना रखो;

    कोई दूसरी फंसाई तो बुरा मान गयी;

    खुद ही कहती थी कि छू कर मुझे सोना कर दो;

    हमने मम्मे दबाये तो बुरा मान गयी;

    कहती थी हमें कि लॉलीपॉप पसंद है;

    हमने लुल्ली जो दिखाई तो बुरा मान गयी;

    ठोकने के लिए उसको हमने खटिया बिछा दी;

    बस इसी बात का बुरा मान गयी;

    खुद ही बोली कि कली से फूल मुझे बना दो;

    हमने जब कर दी चुदाई तो बुरा मान गयी!
  • देश की राजनीति!

    बेटा: पापा पॉलिटिक्स क्या है?

    बाप: तेरी माँ घर चलाती है उसे सरकार मान लो, मैं कमाता हूँ मुझे कर्मचारी मान लो, कामवाली काम करती है उसे मजदूर मान लो तुम देश की जनता, छोटे भाई को देश का भविष्य मान लो।

    बेटा: अब मुझे पॉलिटिक्स समझ में आ गयी पापा, कल रात मैंने देखा की कर्मचारी मजदूर के साथ किचन में मज़े ले रहा था, सरकार सो रही थी, जनता की किसी को फ़िक्र नहीं थी और देश का भविष्य रो रहा था।
  • मस्ती वाली शायरी!

    अर्ज़ किया है दोस्तों...

    चूची तेरी नर्म-नर्म और निप्पल पे आई जवानी,
    गदराये से चूतड़ तेरे गांड तेरी मस्तानी;

    झांट तेरे घुंघरालु जानू, चुत पे चिप-चिप पानी,
    चाटूं इसको, चूसूं इसको, सुंघु इसको रानी;

    लंड मेरा तन्नाया, पा कर गंध सुहानी,
    आओ चोदे रगड़-रगड़ कर और साथ में छोड़े पानी!
  • पलंग की लंबाई!

    शादी के 6 महीने बाद एक लड़की अपने मायके गयी तो अपनी माँ से शिकायतें करने लगी।

    लड़की: माँ जो पलंग तुमने मुझे दहेज़ में दिया है वो लम्बाई में छोटा है।

    माँ गुस्से से बोली, " तो हरामजादी यह बात तुझे आज बतानी याद आ रही है पहले क्यों नहीं बोली?

    लड़की: क्या करूँ माँ पिछले 6 महीने में लाते सीधी करने का मौक़ा ही कल पहली बार मिला।