• मरने की चाहत!

    बुजुर्ग पति-पत्नी एक साथ गुज़र गए। जब ऊपर पहुँचे तो चित्रगुप्त ने बहीखाता देख कर एक दूत से कहा, "इन्हें स्वर्ग में ले जाओ।"

    दूत उन्हें स्वर्ग में ले गया। एक आलीशान बंगले में ले जाकर बोला, "आप दोनों यहां रहेंगे। यहां हर तरह का आराम है। हर तरह की सुविधा उपलब्ध है। नौकर-चाकर हमेशा आपकी सेवा में रहेंगे। और हां, आप जो भी जब भी खाना पीना चाहें, आपको मिलेगा।"

    बुजुर्ग ने पूछा, "अगर हम बीमार हो गए तो डॉक्टर कहां मिलेगा?"

    दूत ने बताया, "स्वर्ग में कभी कोई बीमार नहीं होता।"

    बुजुर्ग लंबी सांस छोड़ते हुए पत्नी से बोला, "अगर हम लोग अपने डॉक्टर की बात न मान कर, फल-सब्जियों की बजाय, अपनी मनमर्जी की चीजें खाते पीते, तो कई साल पहले यहां पहुंच जाते।"
  • एक मर्द का दर्द!

    पिछले हफ्ते मेरी दाढ़ में दर्द हुआ और मैं जिंदगी में पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास गया। रिसेप्शन में बैठे-बैठे मेरी नजर वहाँ दीवार पर लगी डॉक्टर की डिग्री पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही मानो मुझ पर बिजली गिर पड़ी।

    "डॉ. नंदिता प्रधान" यानि, स्कूल के दिनों की हमारी क्लास की हीरोइन। गोरी-चिट्टी, ऊँची-लम्बी, घुँघराले बालों वाली खूबसूरत लड़की।

    अब झूठ क्या बोलूँ, क्लास के दूसरे लड़कों के साथ साथ मैं खुद भी उस पर मरता था, अपनी नंदू पर।

    मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई। मेरा नंबर आने पर मैंने धड़कते दिल से, नंदू के चेम्बर में प्रवेश किया। उसके माथे पर झूलते घुँघराले बाल अब हट चुके थे, गुलाबी गाल अब फूलकर गोल गोल हो गए थे, नीली आँखें मोटे चश्मे के पीछे छुप गयी थीं लेकिन फिर भी नंदू बहुत रौबदार लग रही थी।

    लेकिन उसने मुझे पहचाना नहीं। मेरी दाढ़ की जाँच हो जाने के बाद मैंने ही उससे पूछा, "तुम कान्वेंट में पढ़ती थी ना?"

    वो बोली, "हाँ"

    मैंने पूछा, "10 वीं से कब निकली? 1991 में ना?"

    वो बोली, "करेक्ट! लेकिन आपको कैसे मालूम?"

    मैंने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "अरे, तुम मेरी ही क्लास में थी।"

    फिर
    वो
    भैंस,
    चश्मिश,
    हथनी,
    मोटी,
    भद्दी,
    टुनटुन
    मुझसे बोली... "सर आप कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाते थे?"
  • क्या ये दिल मांगे मोर?

    संता पेप्सी लेकर सामने रख के उदास बैठा था।

    बंता वहां आया और आते ही संता की पेप्सी पी गया और पूछा, "यार तू उदास क्यों है?"

    संता बोला,"यार आज का दिन ही बुरा है।"

    सुबह -सुबह बीवी से झगड़ा हो गया।

    रास्ते में कार खराब हो गई।

    ऑफिस लेट पहुंचा तो बॉस ने नौकरी से निकाल दिया।

    और अब जब जिंदगी से तंग आकर मैंने आत्महत्या करने के लिए पेप्सी में जहर मिलाया तो वो भी तू पी गया अब बता मैं उदास ना होऊं तो क्या करूँ?
  • इंजीनियर!

    एक पादरी, वकील और इंजीनियर को विद्रोह के कारण मौत की सजा मिली। जब सजा देने का वक़्त आया तो अपराधियों को आखिरी ख्वाहिश की प्रथा बताई तो उन्हें गर्दन ऊपर और नीचे रखने के विकल्प मिले।

    पादरी ने ऊपर देखना स्वीकारा ताकि भगवान को देख सके और जैसे ही बटन दबाया गया तो आरी, गर्दन से सिर्फ दो इंच ऊपर रुक गई। अधिकारियों ने इसे ईश्वर की मर्जी समझ के उसे छोड़ दिया।

    वकील ने भी ऊपर देखा और जब आरी रुकी तो वह बोला कानूनन एक व्यक्ति को दो बार सजा नहीं दी जा सकती और वह भी छूट गया।

    इंजीनियर ने भी ऊपर ही देखने का फैंसला किया। जब बटन दबाया जा रहा था तो वो चिल्लाया, "एक मिनट रुको, अगर आप उस हरे और लाल तार को आपस में बदल देंगे तो काम हो जायेगा।"

    बस काम तमाम हो गया।