• पत्नी की अहमियत!

    सुबह उठ कर पत्नी को पुकारते हैं, सुनो चाय लाओ।

    थोड़ी देर बाद फिर आवाज़, सुनो नाश्ता बनाओ।

    क्या बात है, आज अभी तक अखबार नहीं आया।

    जरा देखो तो, किसी ने दरवाजा खटखटाया।

    अरे आज बाथरूम में साबुन नहीं है क्या?

    देखो तो कितना गीला पड़ा है तौलिया।

    अरे,ये शर्ट का बटन टूटा है, जरा लगा दो और मेरे मौजे कहाँ है, जरा ढूंढ के ला दो।

    लंच के डिब्बे में आलू के परांठे दो ज्यादा रख देना।

    देखो अलमारी पर कितनी धूल जमी पड़ी है, लगता है कई दिनों से डस्टिंग नही की है।

    गमले में पौधे सूख रहे हैं, क्या पानी नहीं डालती हो? दिन भर करती ही क्या हो बस गप्पे मारती हो।

    शाम को डोसा खाने का मूड है, बना देना।

    बच्चों की परीक्षाएं आ रही हैं पढ़ा देना।

    सुबह से शाम तक कर फरमाईशें कर नचाते हैं, चैन से सोने भी नहीं देते, सताते हैं।

    दिनभर में बीवियां कितना काम करती हैं ये तब मालूम पड़ता है जब वो बीमार पड़ती हैं। एक दिन में घर अस्त व्यस्त हो जाता है, रोज का सारा रूटीन ही ध्वस्त हो जाता है। आटे दाल का सब भाव पता चल जाता है। बीवी की अहमियत क्या है, ये पता चल जाता है।

    सभी बीवियों को सलाम!
  • पति की बुराई!

    कुछ औरतें आपस में पति-पत्नी के रिश्ते पर बात कर रही थी। थोड़ी देर सुन कर उनमे से एक औरत बोली,

    "अरे बहन, पता नहीं कुछ औरतें अपनी पति की बुराई कैसे कर लेती हैं? अब मेरे वाले को देख लो, अकल के नाम का एक पैसा उसके पास नहीं, शकल राम ने दी नहीं, रंग ऐसा जैसे पैदा होते ही भट्टी में डाल कर किसी ने भून दिया हो और कजूंस तो इतना के कच्छे भी सैकेंड हैंड खरीद के पहनता है। खराटे इतने मारता है कि दिल करता है, सोते ही नाक में मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा दूँ।
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    पर बहन मजाल है जो आज तक मैंने उसकी बुराई की हो। जैसा भी है मेरा तो देवता है, मैं तो कभी नहीं करती उसकी बुराई।"
  • समझदारी का फैंसला!

    एक गाँव में एक बूढ़ा बुजुर्ग अकेला रहता था। उसने अपने जीवन में शादी ही नहीं की थी। एक बार किसी युवक ने उस बुजुर्ग से पूछा, "बाबा आपने जीवन भर शादी क्यों नहीं की?"

    बुजुर्ग थोड़ा मुस्कुराया और बोला, "बेटा यह मेरी जवानी की बात है, एक बार मैं एक पार्टी में गया था, वहाँ अनजाने में मेरा पैर आगे खडी एक खूबसूरत युवती के लटकते पल्लू पर पड़ गया। वो सांप की तरह फुफकार मारकर एकदम पीछे पल्टी और शेर की तरह दहाडी, 'ब्लडी हैल, अंधे हो क्या?"

    युवक: फिर क्या हुआ?

    बुजुर्ग: मैं हकलाकर माफी मांगने लगा। फिर उसकी नजर मेरे चेहरे पर पडी और वो बडे़ ही मधुर स्वर में बोली, 'ओह माफ कीजिये, मैंने समझा मेरे पति हैं।' बस जनाब उस दिन के बाद से आज तक मेरा शादी करने का कभी हौंसला ही नहीं हुआ।"
  • पत्नी के बदलते रंग!

    शादी के बाद पत्नी कैसे बदलती है, जरा गौर कीजिए:

    पहले साल: मैंने कहा जी खाना खा लीजिए, आपने काफी देर से कुछ नहीं खाया।

    दूसरे साल: जी खाना तैयार है, लगा दूं।

    तीसरे साल: खाना बन चुका है, जब खाना हो तब बता देना।

    चौथे साल: खाना बनाकर रख दिया है, मैं बाजार जा रही हूं, खुद ही निकालकर खा लेना।

    पांचवे साल: मैं कहती हूं आज मुझसे खाना नहीं बनेगा, होटल से ले आओ।

    छठे साल: जब देखो खाना, खाना और खाना, अभी सुबह ही तो खाया था।