• सब फ़िल्मी है!

    एक बार ताऊ फिल्म देखण गया, फिल्म का नाम था बॉबी, अर गाणा चाल रया था, "मैं मायके चली जाऊंगी"।

    Dimple: मैं मायके चली जाऊंगी, तुम देखते रहियो।

    ताऊ: न्यू क्यूकर चली ज्यागी, यो तेरी टांग ने तोड़ देगा।

    Rishi Kapoor: मैं दूजा ब्याह रचाउंगा

    ताऊ: येह्ह्ह्ह बात .. छोरे ने कट्या रोग

    Dimple: मैं कुवें में गिर जाउंगी।

    ताऊ: छोरे बहकाए में मत आ ज्याइये .. पाखण्ड कर रिह सै।

    Rishi Kapoor: मैं रस्सी से खिंचवाऊंगा।

    ताऊ: अरे क्या ने खिंचवावे सै..... आगे फेर सेधेगी।

    Dimple: मैं पेड़ पर चढ़ जाउंगी।

    ताऊ: टंगी रहन्दे सासु की नै।

    Rishi Kapoor: मैं आरी से कटवाऊंगा

    ताऊ: अरे तू भी मैंने तो किमे नकली सा ए लाग्या... खामखाँ अपनी बुआ नै सिर पै चढ़ा रया सै।

    Dimple: मैं मायके नहीं जाउंगी, मैं मायके नहीं जाउंगी।

    ताऊ: तावलिये होश ठिकाणे आगे
  • डॉक्टर बेटे!

    एक जाट के 4 जवान छोरे थे। जाट चाह रहा था कि उनकी जल्द से जल्द शादी हो जाये। इसी के चलते उसने अपने किसी नज़दीकी से रिश्ते की बात चलाई।

    रिश्ते की बात करने लड़की वाले जाट के घर आये। सब कुछ देख परख के लड़की के पिता ने जाट से पूछा, "चौधरी साहब, लड़के क्या करते हैं?"

    चौधरी: मुझे लगता है ये चारों के चारों डॉक्टर हैं।

    लड़की का पिता: लगता है क्या मतलब? आपको इन के बारे में कुछ नहीं पता क्या? ये बात तो जँची नहीं चौधरी साहब।

    चौधरी: जँच तो मेरे भी ना रही पर बात यह है कि, मैं इन चारों से कुछ भी पूछ लूँ तो फौरन कहते हैं, "तेरे को क्या बीमारी है?"
  • हरियाणवी मेट्रो!

    मेट्रो हरियाणा में प्रवेश करने जा रही है तो फिर Anouncement भी हरियाणवी में होनी चाहिए। कैसी होगी Announcement:

    🔹आगला टेसन बहादुरगढ़ "सै, किवाड ओले हाथ नै, खुल्लैंगे, गाड्डी में तै सुथरी ढाल उतरियो अर उतरती हाण एक-दुसरे कै ख्स्सन की कोय जरुत ना है।

    🔹गाड्डी में जो भी माणस होक्का-बीड़ी पींता पाया, तो पकड़ के तोड्या जागा, कदै पाछै न्यू कहो अक बताई ना थी।

    🔹खागडां तै निवेदन है बडे-बूढ्ढ्यां नै अर बालक आली बीरबानियां ताईं सीट छोड दें।

    🔹चालती गाड्ड़ी की सूध में पहलडा डिब्बा लुगाईयां ताईं है, मलंग भिरड के छत्ते की ढाल उडै ना मंडरावैं।

    🔹गाड्डी में चोर-डाकुवां तै चौकस रहियो ।
  • जाट और बाबा!

    जाट को खेत में टयूबवेल लगवाना था। सोचा कि बाबा जी से पूछ लूँ कि पानी कहाँ होगा? बाबा जी ने सारे खेत में घूम कर एक कोने में हाथ रख दिया और बोला कि यहाँ टयूबवेल लगा ले और 1100/- रु. ले लिये।

    जाट बेचारा भुरभुरे स्वभाव का था। बाबा जी से बोला, "मैं बहुत खुश हूँ... आप मेरे घर खाना खाने आओ।"

    बाबा ने सोचा कि फंस गई मुर्गी आज तो और हाँ कर दी।

    जाट घर जा कर अपनी पत्नि से बोला, "बाबा जी जिम्मण आवेंगे पकवान बना ले और एक कटोरी में नीचे देसी घी और उपर चावल डाल दिये।"

    पत्नि बोली कि घी तो उपर होता है।

    जाट बोला कि आज तू घी नीचे रखिये।

    बाबा जी आ गये और चावल वाली कटोरी देख कर बोले, "बेटा इस में घी तो है ही नहीं।"

    जाट ने चप्पल निकाल के एक धरी बाबा के कान के नीचे और बोला, "तन्नै खेत में 250 फुट नीचे का पानी देख लिया, कटोरी में 2 इंच नीचे घी नी दिक्खया?"