• जिन्न भी हर काम नहीं कर सकता!

    एक बार संता को रास्ते में एक चिराग मिला तो उसने सोचा कि, "क्यों ना चिराग रगड़ कर देखूं शायद इसमें से कोई जिन्न ही निकल आये"।

    यह सोच कर संता ने चिराग रगडा, तो उसमे से धुंए के साथ एक जिन्न निकल कर आया और संता से बोला।

    जिन्न: क्या हुकुम है मेरे आका?

    संता: मेरे बैंक खाते में 100 करोड़ रूपए जमा करा दो।

    जिन्न: यह तो थोडा मुश्किल काम है आका कोई और हुकुम करें।

    संता: तो ठीक है मेरे घर से लेकर अमेरिका तक सीधी सड़क बना दो।

    जिन्न: आका यह काम भी थोडा नामुमकिन सा है कोई और आदेश करें?

    जिन्न की बात सुन कर संता ने ठंडी सी आह भरते हुए कहा, "अच्छा चलो कम से कम मेरी बीवी को थोड़ी सी अक्ल देकर समझदार तो बना दो"।

    संता की बात सुन कर जिन्न तपाक से बोला, "आका सड़क सिंगल लेन बनानी है या डबल लेन"?
  • दिखावों पे ना जाओ अपनी अक्ल लगाओ!

    एक ट्रेन मेँ एक पंडित एक गुज्जर एक बनिया और एक जाट सफर कर रहे थे।

    पंडित ने रौब झाडते हुऐ 100 का नोट निकाला और उस पर तम्बाकू डाल कर उसको बीडी बना कर पीने लगा।

    फिर गुज्जर ने 500 का नोट निकाला उसने भी पंडित की तरह बीडी बनायी और पीने लगा।

    अब बनिया कहाँ पीछे रहने वाला था, उसने 1000 का नोट निकाला और बीडी बनाकर पीने लगा।

    अब आ गयी जाट की बारी।

    जाट ने चेकबुक निकाली एक करोड की रकम भर के चेक की बीडी बनायी और पीने लगा।

    सब बेहोश और जाट मदहोश!
  • जिद!

    एक बालक जिद पर अड़ गया... बोला कि छिपकली खाऊंगा।

    घरवालों ने बहुत समझाया पर नहीं माना।

    हार कर उसके गुरु जी को बुलाया गया। वे जिद तुड़वाने में महारथी थे।

    गुरु के आदेश पर एक छिपकली पकड़वाई गई. उसे प्लेट में परोस बालक के सामने रख गुरु बोले, ले खा... बालक मचल गया।

    बोला, तली हुई खाऊंगा।

    गुरु ने छिपकली तलवाई और दहाड़े, ले अब चुपचाप खा. बालक फिर गुलाटी मार गया और बोला, आधी खाऊंगा।

    छिपकली के दो टुकड़े किये गये। बालक गुरु से बोला, "पहले आप खाओ"।

    गुरु ने आंख नाक और भी ना जाने क्या क्या भींच किसी तरह आधी छिपकली निगली गुरु के छिपकली निगलते ही बालक दहाड़ मार कर रोने लगा और बोला," आप तो वो टुकड़ा खा गये जो मैंने खाना था।

    गुरु ने धोती सम्भाली और वहां से भाग निकले कि अब जरा भी यहां रुका तो ये दुष्ट दूसरा टुकड़ा भी खिला कर मानेगा।

    यह देख मुझे अरविन्द केजरीवाल की याद आ गयी।

    करना-धरना कुछ नहीं,नौटंकी दुनिया भर की।
  • तुम्हें कैसे अंडे पसंद है?

    संता और जीतो की शादी हो गयी, संता ने सोचा ये एक नए ज़माने की शादी है इसलिए दोनों की जिम्मेवारियां बराबर होनी चाहिए।

    इसलिए हनीमून से लौट कर पहली ही सुबह संता जीतो के लिए बिस्तर पर ही ब्रेकफास्ट लाया।

    जीतो उसकी पाक कला से ज्यादा प्रभावित नहीं हुई, उसने बड़े अनादर से ट्रे की तरफ देखा और सूंघकर कहा,"उबला हुआ अंडा, मुझे तो तला हुआ अंडा चाहिए था।"

    अगली सुबह संता पूरे जोश में अपनी पत्नी की पसंद का तला हुआ अंडा ले आया, जीतो ने वो भी नहीं खाया,"तुम्हें पता नहीं मुझे अलग अलग किस्म के अंडे पसंद है? आज मुझे उबला हुआ अंडा चाहिए था।"

    अपनी पत्नी को खुश करने के लिए अगले दिन सुबह बंता ने उसकी पसंद के दो अंडे बनाये, एक उबला हुआ एक तला हुआ और कहा लो मेरी जान खाओ।

    जीतो एकदम गुस्से हो गयी, "तुम मूर्ख हो! तुमने गलत अंडा तल दिया और गलत उबाल दिया।"