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शॉपिंग भी गुनाह है!

जजः तुम्हे गिरफ्तार क्यों किया गया ?

चोर: पता नहीं साहब मैं तो सुबह-सुबह शॉपिंग कर रहा था और हवालदार साहब मुझे गिरफ्तार करके यहाँ ले आये।

जजः अच्छा लेकिन यह तो कोई गुनाह नहीं हुआ?

चोर: हां मैं भी कब से इन्हें यही समझाने की कोशिश कर रहा हूं।

जजः आप सुबह किस वक्त शॉपिंग कर रहे थे?

चोर: जी दुकान खुलने से पहले।

बेचारा सांभा!

गब्बर: कितने आदमी थे?

सांभा: सरदार दो।

गब्बर: मुझे गिनती नहीं आती, दो कितने होते हैं?

सांभा: सरदार दो, एक के बाद आता है।

गब्बर: और दो के पहले?

सांभा: दो के पहले एक आता है सरदार।

गब्बर:तो बीच में कौन आता है?

सांभा: बीच में कोई नहीं आता सरदार।

गब्बर: तो फिर दोनों एक साथ क्यों नहीं आते?

सांभा: एक के बाद ही दो आ सकता है क्योंकि दो, एक से बड़ा है सरदार।

गब्बर: दो, एक से कितना बड़ा है।

सांभा: दो, एक से एक बड़ा है सरदार।

गब्बर:अगर दो, एक से एक बड़ा है तो एक, एक से कितना बड़ा है?

सांभा: सरदार अब आप मुझे गोली ही मार दो मैंने आप नमक ही खाया है च्यवनप्राश नही।

मेहनत की कमाई!

एक बार एक कारखाने के मालिक की मशीन ने काम करना बंद कर दिया. कई दिनों की मेहनत के बाद भी मशीन ठीक नहीं हो पायी. मालिक को रोज लाखों का नुकसान हो रहा था।

तभी वहाँ एक कारीगर पहुँचा और उसने दावा किया की वो मशीन को ठीक कर सकता है।

मालिक फौरन ही उसे कार्यशाला में ले गया।

मशीन ठीक करने से पहले कारीगर ने मालिक से कहा कि वो मशीन तो ठीक कर देगा लेकिन मेहनताना अपनी मर्जी से तय करेगा।

मालिक का तो रोज लाखों का नुकसान रोज हो रहा था इसलिये वो मान गया।

कारीगर ने पूरी मशीन का मुआयाना किया और एक पेच को कस दिया।

मशीन को चालू किया गया. मशीन ने कार्य करना शुरू कर दिया था।

मालिक बहुत खुश हु़आ।

कारीगर ने दस हजार रूपया मेहनताना मांगा।

मालिक को बहुत आश्चर्य हुआ।

केवल एक पेच कसने के दस हजार रूपय! लेकिन उसने अपना वादा निभाया और दस हजार रूपए कारीगर को देते हुये पूछा कि एक पेच कसने के दस हजार रूपय कुछ ज्यादा नहीं हैं?

कारीगर ने तुरंत जवाब दिया, "साहब पेच कसने का तो केवल मैंने एक रूपया लिया है, बाकि 9999 रूपय तो कौन सा पेच कसना है यह पता करने के लिये हैं।"

बेरोज़गारी का हाल!

नदी में डूबते हुए आदमी ने पुल पर चलते हुए आदमी को आवाज़ लगायी।

आदमी: "बचाओ-बचाओ।"

पुल पर चलते आदमी ने नीचे देखा और उस आदमी को बचाने के लिए पुल से नीचे रस्सी फैंकी और कहा, "रस्सी को पकड़ के ऊपर आ जाओ।"

परन्तु नदी में डूबता हुआ आदमी रस्सी नहीं पकड़ पा रहा था तो वह डर के मारे चिल्ला कर बोला, "मैं मरना नहीं चाहता, ज़िन्दगी बड़ी कीमती है कल ही तो मेरी टार्जन कंपनी में बड़ी अच्छी नौकरी लगी है।"

इतना सुनते ही पुल पर चलते आदमी ने अपनी रस्सी खींच ली और भागते-भागते टार्जन कंपनी के दफ्तर में गया वहां के मैनेजर से बोला," जिस आदमी को आपने कल नौकरी दी थी वो अभी-अभी डूबकर मर गया है, और इस तरह आपकी कंपनी में एक जगह खाली हो गयी है, मैं बेरोजगार हूँ इसीलिए मुझे रख लीजिये।"

मैनेजर: "दोस्त, तुमने देर कर दी, अब से कुछ देर पहले हमने उस आदमी को रखा है, जो उसे धक्का दे कर तुमसे पहले यहाँ आया है"