Hindi Jokes Page 5
एक बार संता और बंता समुद्र किनारे सैर कर रहे होते हैं, कि तभी अचानक बंता के दिमाग में एक सवाल आता है तो वह संता से पूछता है, "यार संता एक बात बता।"
संता: हाँ बोल।
बंता: जब हर आदमी को शादी करने के नुक्सान पता होते हैं, तो फिर भी वो शादी क्यों करता है?
संता: अरे वो इस लिए कि मरने के बाद अगर उसकी आत्मा स्वर्ग जाए तो वो अच्छा महसूस करे और अगर नर्क जाए तो उसे घर जैसा महसूस हो।
गब्बर: कितने आदमी थे?
सांभा: सरदार दो।
गब्बर: मुझे गिनती नहीं आती, दो कितने होते हैं?
सांभा: सरदार दो, एक के बाद आता है।
गब्बर: और दो के पहले?
सांभा: दो के पहले एक आता है सरदार।
गब्बर:तो बीच में कौन आता है?
सांभा: बीच में कोई नहीं आता सरदार।
गब्बर: तो फिर दोनों एक साथ क्यों नहीं आते?
सांभा: एक के बाद ही दो आ सकता है क्योंकि दो, एक से बड़ा है सरदार।
गब्बर: दो, एक से कितना बड़ा है।
सांभा: दो, एक से एक बड़ा है सरदार।
गब्बर:अगर दो, एक से एक बड़ा है तो एक, एक से कितना बड़ा है?
सांभा: सरदार अब आप मुझे गोली ही मार दो मैंने आप नमक ही खाया है च्यवनप्राश नही।
एक बार एक शराबी रात के 12 बजे शराब की दुकान के मालिक को फ़ोन करता है और कहता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"
दुकानदार: सुबह 9 बजे।
शराबी फिर थोड़ी देर बाद दोबारा दुकानदार को फ़ोन करके पूछता है, "तेरी दुकान कब खुलेगी?"
दुकानदार: कहा ना सुबह 9 बजे।
कुछ देर बाद शराबी फिर से दुकानदार को फ़ोन कर देता है और पूछता है,"भाई साहब आपकी दुकान कब खुलेगी?"
दुकानदार: अबे तुझे कितनी बार बताऊँ सुबह 9 बजे खुलेगी इसीलिए सुबह 9 बजे आना और जो भी चाहिए हो ले जाना।
शराबी: अबे, मैं तेरी दुकान के अन्दर से ही बोल रहा हूँ।
एक बार एक कारखाने के मालिक की मशीन ने काम करना बंद कर दिया. कई दिनों की मेहनत के बाद भी मशीन ठीक नहीं हो पायी. मालिक को रोज लाखों का नुकसान हो रहा था।
तभी वहाँ एक कारीगर पहुँचा और उसने दावा किया की वो मशीन को ठीक कर सकता है।
मालिक फौरन ही उसे कार्यशाला में ले गया।
मशीन ठीक करने से पहले कारीगर ने मालिक से कहा कि वो मशीन तो ठीक कर देगा लेकिन मेहनताना अपनी मर्जी से तय करेगा।
मालिक का तो रोज लाखों का नुकसान रोज हो रहा था इसलिये वो मान गया।
कारीगर ने पूरी मशीन का मुआयाना किया और एक पेच को कस दिया।
मशीन को चालू किया गया. मशीन ने कार्य करना शुरू कर दिया था।
मालिक बहुत खुश हु़आ।
कारीगर ने दस हजार रूपया मेहनताना मांगा।
मालिक को बहुत आश्चर्य हुआ।
केवल एक पेच कसने के दस हजार रूपय! लेकिन उसने अपना वादा निभाया और दस हजार रूपए कारीगर को देते हुये पूछा कि एक पेच कसने के दस हजार रूपय कुछ ज्यादा नहीं हैं?
कारीगर ने तुरंत जवाब दिया, "साहब पेच कसने का तो केवल मैंने एक रूपया लिया है, बाकि 9999 रूपय तो कौन सा पेच कसना है यह पता करने के लिये हैं।"