• लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार, मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार, मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    ~ Adi Shankaracharya
  • लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार ,मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    लोग अभी तक याद रखते हैं जब तक उनकी सांसे चलती है जैसे ही सांसे चलानी बंद हो जाती है सबसे करीबी रिश्तेदार ,मित्र यहां तक कि पत्नी भी अपनों से दूर चली जाती है ।
    ~ Adi Shankaracharya
  • नम्रता की ऊंचाई को नापा नहीं जा सकता |
    नम्रता की ऊंचाई को नापा नहीं जा सकता |
    ~ Vinoba Bhave
  • शरीर का दुःख तभी मिटता है, जब मन का दुःख मिटता है |
    शरीर का दुःख तभी मिटता है, जब मन का दुःख मिटता है |
    ~ Maharshi Vedvyas
  • जिस प्रकार अन्न नमक के बिना स्वादरहित और फीका लगता है, ठीक उसी तरह से वाचाल की कही हुई बाते निस्सार होते हैं, और लोगो को रुचिकर नहीं लगते |
    जिस प्रकार अन्न नमक के बिना स्वादरहित और फीका लगता है, ठीक उसी तरह से वाचाल की कही हुई बाते निस्सार होते हैं, और लोगो को रुचिकर नहीं लगते |
    ~ Saint Tukaram
  • यदि आप एक दरवाजे से अंदर नहीं जा पा रहे हो, तो आप दूसरे दरवाजे से अन्दर जावो, क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो जाए, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही|

Rabindranath Tagore'
    यदि आप एक दरवाजे से अंदर नहीं जा पा रहे हो, तो आप दूसरे दरवाजे से अन्दर जावो, क्योकि वर्तमान चाहे कितना भी अंधकार क्यों न हो जाए, कुछ तो शानदार सामने आएगा ही| Rabindranath Tagore'
  • बढ़ती हुई उम्र के साथ सारी चीजे धुंधली होने लगती है, यहाँ तक की दिमाग भी ।
    बढ़ती हुई उम्र के साथ सारी चीजे धुंधली होने लगती है, यहाँ तक की दिमाग भी ।
    ~ Virgil
  • हमे शाकाहारी के मूल्यों का प्रचार करना चाहिए|
    हमे शाकाहारी के मूल्यों का प्रचार करना चाहिए|
    ~ Morar Ji Desai
  • हम जीवन को ज्यादा सम्मान देते हैं लेकिन मौत हमारे लिए केवल सच्चाई का श्रेय हैं|
    हम जीवन को ज्यादा सम्मान देते हैं लेकिन मौत हमारे लिए केवल सच्चाई का श्रेय हैं|
    ~ Voltaire
  • बाहरी ताकतों को अपने से दूर रखना और दुनिया के तमाम चीजों की तरफ आकर्षित ना होना ही आत्मसंयम कहलाता है।
    बाहरी ताकतों को अपने से दूर रखना और दुनिया के तमाम चीजों की तरफ आकर्षित ना होना ही आत्मसंयम कहलाता है।
    ~ Adi Shankaracharya