• अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,<br/>
गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
    अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,
    गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
  • न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;<br/>
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
    न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;
    रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
  • हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,<br/>
जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!
    हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,
    जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!
  • गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता  नहीं;<br/>
लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
    गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता नहीं;
    लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
  • क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;<br/>
बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;
    बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    ~ Javed Akhtar
  • परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;<br/>
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
    परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;
    हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
  • करो फिर से कोई वादा कभी न बिछड़ने का,<br/>
तुम्हें क्या फर्क पड़ता है फिर से मुकर जाना!
    करो फिर से कोई वादा कभी न बिछड़ने का,
    तुम्हें क्या फर्क पड़ता है फिर से मुकर जाना!
  • आते हैं आने दो ये तूफ़ान क्या ले जाएंगे;<br/>
मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे!
    आते हैं आने दो ये तूफ़ान क्या ले जाएंगे;
    मैं तो जब डरता कि मेरा हौसला ले जाएंगे!
    ~ Wasim Barelvi
  • होता है फख्र देख के अक्सर ही आईना;<br/>
मैंने कभी ज़मीर का सौदा नहीं किया!
    होता है फख्र देख के अक्सर ही आईना;
    मैंने कभी ज़मीर का सौदा नहीं किया!
  • ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;<br/>
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!<br/><br/>
ख़िज़ां - पतझड़
    ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;
    हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!

    ख़िज़ां - पतझड़
    ~ Mubarak Siddiqui