• खामोश लबों से निभाना था ये रिश्ता;<br/>
पर धड़कनों ने चाहत का शोर मचा दिया।Upload to Facebook
    खामोश लबों से निभाना था ये रिश्ता;
    पर धड़कनों ने चाहत का शोर मचा दिया।
  • जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;<br/>
बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।Upload to Facebook
    जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;
    बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।
  • किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;<br/>
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।<br/><br/>

शब-ए-वस्ल  =   मिलन की रातUpload to Facebook
    किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;
    तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।

    शब-ए-वस्ल = मिलन की रात
    ~ Akbar Allahabadi
  • आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;<br/>
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।Upload to Facebook
    आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;
    हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।
  • आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;<br/>
कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!Upload to Facebook
    आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;
    कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!
    ~ Mohammad Rafi Sauda
  • किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल;<br/>
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!Upload to Facebook
    किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल;
    कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!
  • हारा हुआ सा वजूद लगता है मेरा;<BR/>
हर किसी ने लूटा है मोहब्बत का वास्ता देकर!Upload to Facebook
    हारा हुआ सा वजूद लगता है मेरा;
    हर किसी ने लूटा है मोहब्बत का वास्ता देकर!
  • मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;<BR/>
मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!Upload to Facebook
    मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;
    मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!
  • अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;<br/>
मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!<br/><br/>

अर्ज़-ओ-समा  =  धरती और आकाश<br/>  
वुसअत  =  विशालता, सम्पूर्णताUpload to Facebook
    अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके;
    मेरा ही दिल है वो कि जहाँ तू समा सके!

    अर्ज़-ओ-समा = धरती और आकाश
    वुसअत = विशालता, सम्पूर्णता
    ~ Khwaja Mir Dard
  • यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इंतेहा;<br/>
कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से!Upload to Facebook
    यह मेरा इश्क़ था या फिर दीवानगी की इंतेहा;
    कि तेरे ही करीब से गुज़र गए तेरे ही ख्याल से!