• ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;<br/>
हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!<br/><br/>
ख़िज़ां - पतझड़
    ख़िज़ां की रुत में गुलाब लहजा बनाके रखना, कमाल ये है;
    हवा की ज़द पे दिया जलाना, जला के रखना, कमाल ये है!

    ख़िज़ां - पतझड़
    ~ Mubarak Siddiqui
  • रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;<br/>
क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
    रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;
    क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
  • दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;<br/>
दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;
    दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    ~ Nazeer Akbarabadi
  • हमारी तो तासीर ही यूँ है तावीजों की तरह;<br/>
जिसके भी गले मिलते हैं उसकी बरकत हो जाती है!
    हमारी तो तासीर ही यूँ है तावीजों की तरह;
    जिसके भी गले मिलते हैं उसकी बरकत हो जाती है!
  • सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए;<br/>
जुर्म भी है, तो ये किया जाए; <br/>
हर मुसाफ़िर को ये शऊर कहाँ;<br/>
कब रुका जाए, कब चला जाए!
    सच के हक़ में खड़ा हुआ जाए;
    जुर्म भी है, तो ये किया जाए;
    हर मुसाफ़िर को ये शऊर कहाँ;
    कब रुका जाए, कब चला जाए!
  • रहने दे उधार इक मुलाकात यूँ ही;<br/>
सुना है उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते!
    रहने दे उधार इक मुलाकात यूँ ही;
    सुना है उधार वालों को लोग भुलाया नहीं करते!
  • सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,<br/>
उधर ही ले चलो कश्ती जहाँ तूफान आया है।
    सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,
    उधर ही ले चलो कश्ती जहाँ तूफान आया है।
  • सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;<br/>
झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
    सच को तमीज़ ही नहीं बात करने की;
    झूठ को देखो, कितना मीठा बोलता है।
  • एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,<br/>
जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
    एक तेरी ज़िद्द ने हमें किस हाल में ला दिया,
    जो जज़्बात सिर्फ़ तेरे लिए थे, उन्हें ज़माना पढ़ रहा है!
  • जहाँ कमरों में कैद हो जाती है `जिंदगी`,<br/>
लोग उसे `बड़ा शहर` कहते हैं!
    जहाँ कमरों में कैद हो जाती है "जिंदगी",
    लोग उसे "बड़ा शहर" कहते हैं!