• किसी भी ​मुश्किल का अब किसी को हल नहीं मिलता;<br/>
​शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नहीं निकलता।
    किसी भी ​मुश्किल का अब किसी को हल नहीं मिलता;
    ​शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नहीं निकलता।
  • माँ तेरे दूध का हक मुझसे अदा क्या होगा;<br/>
तू है नाराज तो खुश मुझसे खुदा क्या होगा!
    माँ तेरे दूध का हक मुझसे अदा क्या होगा;
    तू है नाराज तो खुश मुझसे खुदा क्या होगा!
  • सारी जिंदगी रखा है रिश्तों का भरम मैंने, लेकिन सच तो यह है कि...<br/>

खुद के सिवा कोई अपना नहीं होता!
    सारी जिंदगी रखा है रिश्तों का भरम मैंने, लेकिन सच तो यह है कि...
    खुद के सिवा कोई अपना नहीं होता!
  • देख कर आइना तसल्ली हुई;<br/>
हम को इस घर में जानता है कोई!
    देख कर आइना तसल्ली हुई;
    हम को इस घर में जानता है कोई!
    ~ Gulzar
  • लफ़्ज़ों का इस्तेमाल हिफाज़त से करिये;
ये परवरिश का बेहतरीन सबूत होते हैं!
    लफ़्ज़ों का इस्तेमाल हिफाज़त से करिये; ये परवरिश का बेहतरीन सबूत होते हैं!
  • फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो, जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो;<br/>
जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ, आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।
    फलसफा समझो न असरारे सियासत समझो, जिन्दगी सिर्फ हकीक़त है हकीक़त समझो;
    जाने किस दिन हो हवायें भी नीलाम यहाँ, आज तो साँस भी लेते हो ग़नीमत समझो।
  • जाने वो कैसे मुकद्दर की किताब लिख देता है,<br/>
साँसे गिनती की, और ख्वाहिशें बेहिसाब लिख देता है!
    जाने वो कैसे मुकद्दर की किताब लिख देता है,
    साँसे गिनती की, और ख्वाहिशें बेहिसाब लिख देता है!
  • जो किताबों में है वो सब का है,<br/>
तू बता तेरा तजरबा क्या है!
    जो किताबों में है वो सब का है,
    तू बता तेरा तजरबा क्या है!
    ~ Nida Fazli
  • इक साल गया इक साल नया है आने को;<br/>
पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को!
    इक साल गया इक साल नया है आने को;
    पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को!
    ~ Ibn e Insha
  • तारीख़ें भी जवान हो रही हैं;<br/>
सुना है कैलेंडर को बीसवाँ साल लग रहा है!
    तारीख़ें भी जवान हो रही हैं;
    सुना है कैलेंडर को बीसवाँ साल लग रहा है!