• बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए;<br/>
दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है!Upload to Facebook
    बुत-ख़ाना तोड़ डालिए मस्जिद को ढाइए;
    दिल को न तोड़िए ये ख़ुदा का मक़ाम है!
    ~ Aatish Haidar Ali
  • इश़्क तो मर्ज़ ही बुढ़ापे का है;<br/>
जवानी में, फ़ुर्सत ही कहाँ आवारगी से!Upload to Facebook
    इश़्क तो मर्ज़ ही बुढ़ापे का है;
    जवानी में, फ़ुर्सत ही कहाँ आवारगी से!
  • चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;<br/>
ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।Upload to Facebook
    चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी;
    ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गए।
  • कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया;<br/>
जिस को ख़ाना-ख़राब होना था।<br/><br/>


कूचा-ए-इश्क़  =  प्यार की गली<br/>
ख़ाना-ख़राब  =  बर्बादUpload to Facebook
    कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया;
    जिस को ख़ाना-ख़राब होना था।

    कूचा-ए-इश्क़ = प्यार की गली
    ख़ाना-ख़राब = बर्बाद
    ~ Jigar Moradabadi
  • चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ;<br/>
तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।<br/><br/>
नशात  =  ख़ुशी<br/>  
महव-ए-यास  =  दुःख में खोनाUpload to Facebook
    चंद कलियाँ नशात की चुन कर मुद्दतों महव-ए-यास रहता हूँ;
    तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।

    नशात = ख़ुशी
    महव-ए-यास = दुःख में खोना
    ~ Sahir Ludhianvi
  • आँखों में आ जाते हैं आँसू;<br/>
फिर भी लबों पे हँसी रखनी पडती है;<br/>
ये मोहब्बत भी क्या चीज है यारों;<br/>
जिस से करते हैं उसी से छुपानी पडती है।Upload to Facebook
    आँखों में आ जाते हैं आँसू;
    फिर भी लबों पे हँसी रखनी पडती है;
    ये मोहब्बत भी क्या चीज है यारों;
    जिस से करते हैं उसी से छुपानी पडती है।
  • सिर्फ बिछड़ जाने से ही तो रिश्ता खतम नहीं होता;<br/>
प्यार वो कुआँ है जिसका पानी कभी कम नहीं होता!Upload to Facebook
    सिर्फ बिछड़ जाने से ही तो रिश्ता खतम नहीं होता;
    प्यार वो कुआँ है जिसका पानी कभी कम नहीं होता!
  • जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;<br/>
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|Upload to Facebook
    जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;
    हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|
    ~ Akbar Allahabadi
  • अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;<br/>
हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!Upload to Facebook
    अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;
    हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!
  • हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;<br/>
किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!Upload to Facebook
    हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;
    किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!