• सिर्फ बिछड़ जाने से ही तो रिश्ता खतम नहीं होता;<br/>
प्यार वो कुआँ है जिसका पानी कभी कम नहीं होता!Upload to Facebook
    सिर्फ बिछड़ जाने से ही तो रिश्ता खतम नहीं होता;
    प्यार वो कुआँ है जिसका पानी कभी कम नहीं होता!
  • जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;<br/>
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|Upload to Facebook
    जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;
    हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|
    ~ Akbar Allahabadi
  • अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;<br/>
हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!Upload to Facebook
    अल्फाज़ अकसर अधूरे ही रह जाते हैं मोहब्बत में;
    हर शख़्स किसी ना किसी की चाहत दिल में दबाये रखता है!
  • हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;<br/>
किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!Upload to Facebook
    हाथ मिलाओ इस क़दर के दिल में हज़ारों मशालें जल जाएँ;
    किसी मुफ़लिस का घर तुम्हारे कर्मों रोशन हो जाए!
  • एक नजर का झोंका आए, और छू जाए दिल को;<br/>
मोहब्बत हो जाने में, वक्त ही कितना लगता है!Upload to Facebook
    एक नजर का झोंका आए, और छू जाए दिल को;
    मोहब्बत हो जाने में, वक्त ही कितना लगता है!
  • इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;<br/>
दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।Upload to Facebook
    इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया;
    दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।
    ~ Mirza Ghalib
  • पहली मोहब्बत पुराने मुक़द्दमे की तरह होती है;<br/>
न ख़त्म होती है और न इन्सान बाइज्जत बरी होता है।Upload to Facebook
    पहली मोहब्बत पुराने मुक़द्दमे की तरह होती है;
    न ख़त्म होती है और न इन्सान बाइज्जत बरी होता है।
  • बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में;<br/>
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में।Upload to Facebook
    बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में;
    कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में।
    ~ Kaifi Azmi
  • हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को;<br/>
जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।Upload to Facebook
    हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को;
    जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।
  • उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी;<br/>
क्या बताऊं जो इन आंखों ने समां देखा था।Upload to Facebook
    उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी;
    क्या बताऊं जो इन आंखों ने समां देखा था।
    ~ Aziz Lucknowi