• काश तुम आकर संभाल लो मुझे;<br/>
थोड़ा सा रह गया हूं मैं इस साल की तरह!
    काश तुम आकर संभाल लो मुझे;
    थोड़ा सा रह गया हूं मैं इस साल की तरह!
  • बहुत सारी उलझनों का जवाब यही है;<br/>
मैं अपनी जगह सही हूँ, और वो अपनी जगह सही है!
    बहुत सारी उलझनों का जवाब यही है;
    मैं अपनी जगह सही हूँ, और वो अपनी जगह सही है!
  • तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी;<br/>
तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया।
    तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी;
    तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया।
  • रहते हैं आसपास ही लेकिन साथ नहीं होते;<br/>
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते!
    रहते हैं आसपास ही लेकिन साथ नहीं होते;
    कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते!
  • ज़िन्दगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं,<br/>
मैंने हर शख्स को यहाँ खुशियों का इंतज़ार करते देखा है!
    ज़िन्दगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं,
    मैंने हर शख्स को यहाँ खुशियों का इंतज़ार करते देखा है!
  • दर्द तो वही देते हैं, जिन्हें आप अपना होने का हक़ देते हैं;<br/>
वरना गैर तो हल्का सा धक्का लगने पर भी माफ़ी माँग लेते हैं!
    दर्द तो वही देते हैं, जिन्हें आप अपना होने का हक़ देते हैं;
    वरना गैर तो हल्का सा धक्का लगने पर भी माफ़ी माँग लेते हैं!
  • कभी-कभी सोचता हूँ कि भूल जाऊँ उसे,<br/>
पर फिर याद आया कि उसके जैसा मिले भी तो कोई!
    कभी-कभी सोचता हूँ कि भूल जाऊँ उसे,
    पर फिर याद आया कि उसके जैसा मिले भी तो कोई!
  • या तो हमें मुक्कमल चालाकियाँ सिखाई जायें,<br/>
नहीं तो मासूमों की अलग बस्तियां बसाई जायें !
    या तो हमें मुक्कमल चालाकियाँ सिखाई जायें,
    नहीं तो मासूमों की अलग बस्तियां बसाई जायें !
  • शिकायत तो आज भी मुझे खुद से है,<br/>
खैर तुमसे तो इश्क़ ही रहेगा!
    शिकायत तो आज भी मुझे खुद से है,
    खैर तुमसे तो इश्क़ ही रहेगा!
  • हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,<br/>
जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!
    हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,
    जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!