• खता हो गयी तो फिर सज़ा सुना दो,<br/>
दिल में इतना दर्द क्यों है वजह बता दो;<br/>
देर हो गयी याद करने में जरूर,<br/>
लेकिन तुमको भुला देंगे ये ख्याल मिटा दो।
    खता हो गयी तो फिर सज़ा सुना दो,
    दिल में इतना दर्द क्यों है वजह बता दो;
    देर हो गयी याद करने में जरूर,
    लेकिन तुमको भुला देंगे ये ख्याल मिटा दो।
  • सुना है उस को मोहब्बत दुआएँ देती हैं;<br/>
जो दिल पे चोट तो खाए मगर गिला न करे।
    सुना है उस को मोहब्बत दुआएँ देती हैं;
    जो दिल पे चोट तो खाए मगर गिला न करे।
  • पांवोंं के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;<br/>
सर पे कितना बोझ है कोई देखता नहीं।
    पांवोंं के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र;
    सर पे कितना बोझ है कोई देखता नहीं।
  • भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया,<br/>
तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया;<br/>
किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो,<br/>
सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।
    भीड़ में भी तन्हा रहना मुझको सिखा दिया,
    तेरी मोहब्बत ने दुनिया को झूठा कहना सिखा दिया;
    किसी दर्द या ख़ुशी का एहसास नहीं है अब तो,
    सब कुछ ज़िन्दगी ने चुप-चाप सहना सिखा दिया।
  • क्यों बयान करूँ अपने दर्द को?<br/>

यहाँ सुनने वाले बहुत हैं, पर समझने वाला कोई नहीं!
    क्यों बयान करूँ अपने दर्द को?
    यहाँ सुनने वाले बहुत हैं, पर समझने वाला कोई नहीं!
  • हारा हुआ सा लगता है वजूद मेरा;<br/>
हर एक ने लूटा है दिल का वास्ता देकर!
    हारा हुआ सा लगता है वजूद मेरा;
    हर एक ने लूटा है दिल का वास्ता देकर!
  • खुदा जाने कौन सा गुनाह कर बैठे हैं हम,<br/>
कि तमन्नाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल  रहे हैं!
    खुदा जाने कौन सा गुनाह कर बैठे हैं हम,
    कि तमन्नाओं वाली उम्र में तजुर्बे मिल रहे हैं!
  • धड़कन बनके जो दिल में समा गए हैं, हर एक पल उनकी याद में बिताते हैं;<br/>
आँसू निकल आये जब वो याद आ गए, जान निकल जाती है जब वो रूठ जाते हैं।
    धड़कन बनके जो दिल में समा गए हैं, हर एक पल उनकी याद में बिताते हैं;
    आँसू निकल आये जब वो याद आ गए, जान निकल जाती है जब वो रूठ जाते हैं।
  • खामोशियाँ कर देतीं बयान तो अलग बात है;<br/>
कुछ दर्द हैं जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते!
    खामोशियाँ कर देतीं बयान तो अलग बात है;
    कुछ दर्द हैं जो लफ़्ज़ों में उतारे नहीं जाते!
  • मोहब्बत से, इनायत से, वफ़ा से चोट लगती है,<br/>
बिखरता फूल हूँ, मुझको हवा से चोट लगती है;<br/>
मेरी आँखों में आँसू की तरह इक रात आ जाओ,<br/>
तकल्लुफ़ से, बनावट से, अदा से चोट लगती है!
    मोहब्बत से, इनायत से, वफ़ा से चोट लगती है,
    बिखरता फूल हूँ, मुझको हवा से चोट लगती है;
    मेरी आँखों में आँसू की तरह इक रात आ जाओ,
    तकल्लुफ़ से, बनावट से, अदा से चोट लगती है!