• किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;<br/>
ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;<br/>
कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;<br/>
मैं समझता रहा सनम की खता है।Upload to Facebook
    किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;
    ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;
    कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;
    मैं समझता रहा सनम की खता है।
  • कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;<br/>
जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।Upload to Facebook
    कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;
    जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।
  • जब लगा था `तीर` तब इतना `दर्द` न हुआ ग़ालिब...<br/>
`ज़ख्म` का एहसास तब हुआ जब `कमान` देखी अपनों के हाथ में।Upload to Facebook
    जब लगा था "तीर" तब इतना "दर्द" न हुआ ग़ालिब...
    "ज़ख्म" का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के हाथ में।
    ~ Mirza Ghalib
  • कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;<br/>
दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।Upload to Facebook
    कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;
    दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।
  • ​फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे​:​<br/>
ये हथेली आज फिर खुजला रही है​।Upload to Facebook
    ​फिर कहीं से दर्द के सिक्के मिलेंगे​:​
    ये हथेली आज फिर खुजला रही है​।
  • वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;<br/>
हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे;<br/>
और हमें बेवफ़ा का नाम मिला;<br/>
क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।Upload to Facebook
    वो तो अपने दर्द रो-रो कर सुनाते रहे;
    हमारी तन्हाईयों से आँखें चुराते रहे;
    और हमें बेवफ़ा का नाम मिला;
    क्योंकि हम हर दर्द मुस्कुरा कर छिपाते रहे।
  • कितने वर्षों का सफ़र ख़ाक हुआ;<br/>
जब उसने पुछा कहो कैसे आना हुआ।Upload to Facebook
    कितने वर्षों का सफ़र ख़ाक हुआ;
    जब उसने पुछा कहो कैसे आना हुआ।
  • हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला;<br/>
होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता।Upload to Facebook
    हम ने मोहब्बत के नशे में आ कर उसे खुदा बना डाला;
    होश तब आया जब उस ने कहा कि खुदा किसी एक का नहीं होता।
    ~ Mirza Ghalib
  • चीज़ बेवफ़ाई से बढ़कर क्या होगी;<br/>
ग़म-ए-हालात जुदाई से बढ़कर क्या होगी;<br/>
जिसे देनी हो सज़ा उम्र भर के लिए;<br/>
सज़ा तन्हाई से बढ़कर क्या होगी।Upload to Facebook
    चीज़ बेवफ़ाई से बढ़कर क्या होगी;
    ग़म-ए-हालात जुदाई से बढ़कर क्या होगी;
    जिसे देनी हो सज़ा उम्र भर के लिए;
    सज़ा तन्हाई से बढ़कर क्या होगी।
  • ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;<br/>
आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;<br/>
ये मत पूछना किसने दर्द दिया;<br/>
वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।Upload to Facebook
    ज़ख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे;
    आंसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे;
    ये मत पूछना किसने दर्द दिया;
    वरना कुछ अपनों के सर झुक जाएंगे।