• कांच के दिल थे जिनके उनके दिल टूट गए;<br/>
हमारा दिल था मोम का पिघलता ही चला गया।
    कांच के दिल थे जिनके उनके दिल टूट गए;
    हमारा दिल था मोम का पिघलता ही चला गया।
  • उसे कह दो वो मेरा है किसी और का हो नहीं सकता;<br/>
बहुत नायाब है मेरे लिए वो कोई और उस जैसा हो नहीं सकता;<br/>
तुम्हारे साथ जो गुज़ारे वो  मौसम याद आते हैं;<br/>
तुम्हारे बाद कोई मौसम सुहाना हो नहीं सकता।
    उसे कह दो वो मेरा है किसी और का हो नहीं सकता;
    बहुत नायाब है मेरे लिए वो कोई और उस जैसा हो नहीं सकता;
    तुम्हारे साथ जो गुज़ारे वो मौसम याद आते हैं;
    तुम्हारे बाद कोई मौसम सुहाना हो नहीं सकता।
  • महफ़िल भी रोयेगी, महफ़िल में हर शख्स भी रोयेगा;<br/>
डूबी जो मेरी कश्ती तो चुपके से साहिल भी रोयेगा;<br/>
इतना प्यार बिखेर देंगे हम इस दुनिया में कि;<br/>
मेरी मौत पे मेरा क़ातिल भी रोयेगा।
    महफ़िल भी रोयेगी, महफ़िल में हर शख्स भी रोयेगा;
    डूबी जो मेरी कश्ती तो चुपके से साहिल भी रोयेगा;
    इतना प्यार बिखेर देंगे हम इस दुनिया में कि;
    मेरी मौत पे मेरा क़ातिल भी रोयेगा।
  • लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;<br/>
हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;<br/>
कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;<br/>
वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
    लोगों से कह दो हमारी तक़दीर से जलना छोड़ दें;
    हम घर से खुदा की दुआ लेकर निकलते हैं;
    कोई न दे हमें खुश रहने की दुआ तो भी कोई बात नहीं;
    वैसे भी हमें खुशियां रास नहीं अक्सर इस वजह से लोग छूट जाते हैं।
  • वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;<br/>
हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
    वो बेगानो में अपने, हम अपनों में अंजान लगते हैं;
    हमारे खून की कीमत नहीं, उनके अश्कों के भी दाम लगते हैं।
  • आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज्यादा है;<br/>
तेरे संग ना होना का मलाल कुछ ज्यादा है;<br/>
फिर भी काट रहे हैं जिए जाने की सज़ा यही सोचकर;<br/>
शायद इस ज़िंदगानी में मेरे गुनाह कुछ ज्यादा हैं।
    आज ये तन्हाई का एहसास कुछ ज्यादा है;
    तेरे संग ना होना का मलाल कुछ ज्यादा है;
    फिर भी काट रहे हैं जिए जाने की सज़ा यही सोचकर;
    शायद इस ज़िंदगानी में मेरे गुनाह कुछ ज्यादा हैं।
  • सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;<br/>
प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।
    सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;
    प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।
  • एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;<br/>
कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;<br/>
उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;<br/>
वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।
    एक लफ्ज़ उनको सुनाने के लिए;
    कितने अल्फ़ाज़ लिखे हमने ज़माने के लिए;
    उनका मिलना ही मुक़द्दर में न था;
    वर्ना क्या कुछ नहीं किया उनको पाने के लिए।
  • दिल के दर्द  छुपाना बड़ा मुश्किल है;<br/>
टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है;<br/>
किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो;<br/>
अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।
    दिल के दर्द छुपाना बड़ा मुश्किल है;
    टूट कर फिर मुस्कुराना बड़ा मुश्किल है;
    किसी अपने के साथ दूर तक जाओ फिर देखो;
    अकेले लौट कर आना कितना मुश्किल है।
  • हम रूठे दिलों को मनाने में रह गए;<br/>
गैरों को अपना दर्द सुनाने में रह गए;<br/>
मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी;<br/>
हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।
    हम रूठे दिलों को मनाने में रह गए;
    गैरों को अपना दर्द सुनाने में रह गए;
    मंज़िल हमारी, हमारे करीब से गुज़र गयी;
    हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रह गए।