• उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;​<br/>
अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।
    उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;​
    अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।
  • ​शहर क्या देखें, के हर मंज़र में जाले पड़ गए​;​<br/>
ऐसी गर्मी है, कि पीले फूल काले पड़ गए​;​<br/>
मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को​;​<br/>
मेरा दुख ये है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए।
    ​शहर क्या देखें, के हर मंज़र में जाले पड़ गए​;​
    ऐसी गर्मी है, कि पीले फूल काले पड़ गए​;​
    मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को​;​
    मेरा दुख ये है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए।
    ~ Rahat Indori
  • मुझे मालूम है मैं उस के बिना ज़ी नहीं सकता​;<br/>​उस का भी यही हाल है मगर किसी और के लिए​। ​
    मुझे मालूम है मैं उस के बिना ज़ी नहीं सकता​;
    ​उस का भी यही हाल है मगर किसी और के लिए​। ​
  • हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम;<br/>
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम;<br/>
अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला;<br/>
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
    हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम;
    हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम;
    अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला;
    ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
  • इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ​;​<br/>
शायद तुमने ही पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे​।
    इतना, आसान हूँ कि हर किसी को समझ आ जाता हूँ​;​
    शायद तुमने ही पन्ने छोड़ छोड़ कर पढ़ा है मुझे​।
  • तेरी यादों के सितम सहते हैं हम;<br/>
आज भी पल-पल तेरी यादों में मरते हैं हम;<br/>
तुम तो चले गए बहुत दूर, हमको इस दुनियां में तन्हा छोड़कर;<br/>
पर तुम क्या जानो, बैठकर तन्हाई में किस कदर रोते हैं हम।
    तेरी यादों के सितम सहते हैं हम;
    आज भी पल-पल तेरी यादों में मरते हैं हम;
    तुम तो चले गए बहुत दूर, हमको इस दुनियां में तन्हा छोड़कर;
    पर तुम क्या जानो, बैठकर तन्हाई में किस कदर रोते हैं हम।
    ~ Sarab Sandhu
  • किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;<br/>
ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;<br/>
कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;<br/>
मैं समझता रहा सनम की खता है।
    किया इश्क़ ने मेरा हाल कुछ ऐसा;
    ना अपनी खबर ना ही दिल का पता है;
    कसूरवार थी मेरी ये दौर-ए-जवानी;
    मैं समझता रहा सनम की खता है।
  • कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;<br/>
जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।
    कुछ ऐसे बंधन होते हैं जो बिन बांधे बंध जाते हैं;
    जो बिन बांधे बंध जाते हैं वो जीवन भर तड़पाते है।
  • जब लगा था `तीर` तब इतना `दर्द` न हुआ ग़ालिब...<br/>
`ज़ख्म` का एहसास तब हुआ जब `कमान` देखी अपनों के हाथ में।
    जब लगा था "तीर" तब इतना "दर्द" न हुआ ग़ालिब...
    "ज़ख्म" का एहसास तब हुआ जब "कमान" देखी अपनों के हाथ में।
    ~ Mirza Ghalib
  • कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;<br/>
दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।
    कोई नहीं करता अब इम्दाद मेरे दिल की;
    दुश्मन तो दुश्मन, अपने भी तड़पाते हैं।