• रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने;<br/>
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने;<br/>
हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो;<br/>
अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।
    रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने;
    कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने;
    हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो;
    अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।
  • वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है;<br/>
ज़ख़्म दिल का ज़ुबाँ पर आया है;<br/>
न रोते थे कभी काँटों की चुभन से;<br/>
आज न जाने क्यों फूलों की खुशबू से रोना आया है।
    वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है;
    ज़ख़्म दिल का ज़ुबाँ पर आया है;
    न रोते थे कभी काँटों की चुभन से;
    आज न जाने क्यों फूलों की खुशबू से रोना आया है।
  • दिल मेरा जो अगर रोया न होता;<br/>
हमने भी आँखों को भिगोया न होता;<br/>
दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को;<br/>
ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।
    दिल मेरा जो अगर रोया न होता;
    हमने भी आँखों को भिगोया न होता;
    दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को;
    ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।
  • मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है झरने के रूप में;<br/>
मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है सावन की धूप में;<br/>
घुल-मिल कर बहुत रहते हैं लोग जो शातिर हैं बहुत;<br/>
मैंने अपनों को तनहा देखा है बेगानों के रूप में।
    मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है झरने के रूप में;
    मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है सावन की धूप में;
    घुल-मिल कर बहुत रहते हैं लोग जो शातिर हैं बहुत;
    मैंने अपनों को तनहा देखा है बेगानों के रूप में।
  • कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालात तुम्हारी होती;<br/>
जो रात गुज़ारी मर कर वो रात तुमने गुज़ारी होती।
    कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालात तुम्हारी होती;
    जो रात गुज़ारी मर कर वो रात तुमने गुज़ारी होती।
  • मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है मुस्तक़िल;<br/>
कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है।
    मुद्दत गुज़र गयी कि यह आलम है मुस्तक़िल;
    कोई सबब नहीं है मगर दिल उदास है।
    ~ Ehsaan Danish
  • वक्त नूर को बेनूर कर देता है;<br/>
छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;<br/>
कौन चाहता है अपनों से दूर होना;<br/>
लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।
    वक्त नूर को बेनूर कर देता है;
    छोटे से जख्म को नासूर कर देता है;
    कौन चाहता है अपनों से दूर होना;
    लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता है।
  • अंगुलिया टूट गई, पत्थर तराशते तराशते;<br />
जब बनी सूरत यार की तो खरीददार आ गये!
    अंगुलिया टूट गई, पत्थर तराशते तराशते;
    जब बनी सूरत यार की तो खरीददार आ गये!
  • आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;<br/>
तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;<br/>
कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;<br/>
और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।
    आज तेरी याद हम सीने से लगा कर रोये;
    तन्हाई मैं तुझे हम पास बुला कर रोये;
    कई बार पुकारा इस दिल ने तुम्हें;
    और हर बार तुम्हें ना पाकर हम रोये।
  • देर तो लगती है भरने में उस को;<br/>
जिस ज़ख्म में हो अपनों की इनायत।
    देर तो लगती है भरने में उस को;
    जिस ज़ख्म में हो अपनों की इनायत।