• तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से;<br/>
जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए।
    तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से;
    जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए।
  • इस बहते दर्द को मत रोको;<br/>
यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;<br/>
लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;<br/>
पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
    इस बहते दर्द को मत रोको;
    यह तो सज़ा है किसी के इंतज़ार की;
    लोग इन्हे आँसू कहे या दीवानगी;
    पर यह तो निशानी है किसी के प्यार की।
  • बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी;<br/>
बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी;<br/>
मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ;<br/>
खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
    बिन बताये उसने ना जाने क्यों ये दूरी कर दी;
    बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी;
    मेरे मुकद्दर में ग़म आये तो क्या हुआ;
    खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
  • जमीन छुपाने के लिए गगन होता है;<br/>
दिल छुपाने के लिए बदन होता है;<br/>
शायद मरने के बाद भी छुपाये जाते हैं गम;<br/>
इसीलिए हर लाश पे कफ़न होता है।
    जमीन छुपाने के लिए गगन होता है;
    दिल छुपाने के लिए बदन होता है;
    शायद मरने के बाद भी छुपाये जाते हैं गम;
    इसीलिए हर लाश पे कफ़न होता है।
  • शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को;<br/>
कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए तेरे एक नाम को।
    शीशे में डूब कर पीते रहे उस जाम को;
    कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए तेरे एक नाम को।
  • रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने;<br/>
कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने;<br/>
हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो;<br/>
अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।
    रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हम ने;
    कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने;
    हाँ मालूम है क्या चीज़ हैं मोहब्बत यारो;
    अपना ही घर जला कर देखें हैं उजाले हमने।
  • वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है;<br/>
ज़ख़्म दिल का ज़ुबाँ पर आया है;<br/>
न रोते थे कभी काँटों की चुभन से;<br/>
आज न जाने क्यों फूलों की खुशबू से रोना आया है।
    वक़्त के मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है;
    ज़ख़्म दिल का ज़ुबाँ पर आया है;
    न रोते थे कभी काँटों की चुभन से;
    आज न जाने क्यों फूलों की खुशबू से रोना आया है।
  • दिल मेरा जो अगर रोया न होता;<br/>
हमने भी आँखों को भिगोया न होता;<br/>
दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को;<br/>
ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।
    दिल मेरा जो अगर रोया न होता;
    हमने भी आँखों को भिगोया न होता;
    दो पल की हँसी में छुपा लेता ग़मों को;
    ख़्वाब की हक़ीक़त को जो संजोया नहीं होता।
  • मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है झरने के रूप में;<br/>
मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है सावन की धूप में;<br/>
घुल-मिल कर बहुत रहते हैं लोग जो शातिर हैं बहुत;<br/>
मैंने अपनों को तनहा देखा है बेगानों के रूप में।
    मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है झरने के रूप में;
    मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है सावन की धूप में;
    घुल-मिल कर बहुत रहते हैं लोग जो शातिर हैं बहुत;
    मैंने अपनों को तनहा देखा है बेगानों के रूप में।
  • कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालात तुम्हारी होती;<br/>
जो रात गुज़ारी मर कर वो रात तुमने गुज़ारी होती।
    कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालात तुम्हारी होती;
    जो रात गुज़ारी मर कर वो रात तुमने गुज़ारी होती।