• कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;<br/>
हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;<br/>
अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;<br/>
बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।
    कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते;
    हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते;
    अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा;
    बयां करते तो महफ़िल को रुला देते।
  • कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं;<br/>
इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं;<br/>
झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी;<br/>
इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।
    कभी कभी मोहब्बत में वादे टूट जाते हैं;
    इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते हैं;
    झूठ बोलता होगा कभी चाँद भी;
    इसलिए तो रुठकर तारे टूट जाते हैं।
  • बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;<br/>
यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;<br/>
तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;<br/>
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;<br/>
मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
    बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है;
    यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है;
    तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है;
    अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ;
    मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।
  • रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;<br/>

ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;<br/>

हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;<br/>

ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।
    रोने की सज़ा न रुलाने की सज़ा है;
    ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है;
    हँसते हैं तो आँखों से निकल आते हैं आँसू;
    ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।
  • अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;<br/>
तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;<br/>
ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;<br/>
सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।
    अपनी आँखों के समंदर में उत्तर जाने दे;
    तेरा मुज़रिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे;
    ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको;
    सोचता हूँ कहूँ तुझसे, मगर जाने दे।
  • उल्फत का यह दस्तूर होता है;<br/>

जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है;<br/>

दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे;<br/>

कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है!
    उल्फत का यह दस्तूर होता है;
    जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है;
    दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे;
    कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है!
  • सबने कहा इश्क़ दर्द है;<br/>

हमने कहा यह दर्द भी क़बूल है;<br/>

सबने कहा इस दर्द के साथ जी नहीं पाओगे;<br/>

हमने कहा इस दर्द के साथ मरना भी क़बूल है।
    सबने कहा इश्क़ दर्द है;
    हमने कहा यह दर्द भी क़बूल है;
    सबने कहा इस दर्द के साथ जी नहीं पाओगे;
    हमने कहा इस दर्द के साथ मरना भी क़बूल है।
  • धड़कन बिना दिल का मतलब ही क्या;<br/>
रौशनी के बिना दिये का मतलब ही क्या;<br/>
क्यों कहते हैं लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;<br/>
वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या।
    धड़कन बिना दिल का मतलब ही क्या;
    रौशनी के बिना दिये का मतलब ही क्या;
    क्यों कहते हैं लोग कि मोहब्बत न कर दर्द मिलता है;
    वो क्या जाने कि दर्द बिना मोहब्बत का मतलब ही क्या।
  • उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;​<br/>
अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।
    उसकी आँखों में नज़र आता है सारा जहां मुझ को;​
    अफ़सोस कि उन आँखों में कभी खुद को नहीं देखा।
  • ​शहर क्या देखें, के हर मंज़र में जाले पड़ गए​;​<br/>
ऐसी गर्मी है, कि पीले फूल काले पड़ गए​;​<br/>
मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को​;​<br/>
मेरा दुख ये है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए।
    ​शहर क्या देखें, के हर मंज़र में जाले पड़ गए​;​
    ऐसी गर्मी है, कि पीले फूल काले पड़ गए​;​
    मैं अँधेरों से बचा लाया था अपने आप को​;​
    मेरा दुख ये है, मेरे पीछे उजाले पड़ गए।
    ~ Rahat Indori