• कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,<br/>
तारीफ करूँ या चुप रहूँ, जुर्म दोनो ही संगीन हैं!
    कुछ अपना अंदाज हैं कुछ मौसम रंगीन हैं,
    तारीफ करूँ या चुप रहूँ, जुर्म दोनो ही संगीन हैं!
  • कुछ तो चाहत होगी इन बारिश की बूंदों की;<br/>
वरना कौन गिरता है इस ज़मीन पे आसमान तक पहुँचने के बाद!
    कुछ तो चाहत होगी इन बारिश की बूंदों की;
    वरना कौन गिरता है इस ज़मीन पे आसमान तक पहुँचने के बाद!
  • इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;<br/>
कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
    इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;
    कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
  • बरसात का मौसम तो गुज़र गया;<br/>
आँखों में नमी मगर अब भी है!
    बरसात का मौसम तो गुज़र गया;
    आँखों में नमी मगर अब भी है!
  • जो ख़ुलूस से मिलता है बरस जाता हूँ;<br/>
मैं बरसात का इक बादल आवारा सा हूँ!
    जो ख़ुलूस से मिलता है बरस जाता हूँ;
    मैं बरसात का इक बादल आवारा सा हूँ!
  • अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम;<br/>
हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है।
    अच्छा-सा कोई मौसम तन्हा-सा कोई आलम;
    हर वक़्त का रोना तो बेकार का रोना है।
    ~ Nida Fazli
  • सहम उठते हैं कच्चे मकान, पानी के खौफ़ से;<br/>
महलों की आरज़ू ये है कि, बरसात तेज हो!
    सहम उठते हैं कच्चे मकान, पानी के खौफ़ से;
    महलों की आरज़ू ये है कि, बरसात तेज हो!
  • मौसम बहुत सर्द है,<br/>
चल ऐ दिल कुछ ख्वाहिशों को आग लगाते हैं।
    मौसम बहुत सर्द है,
    चल ऐ दिल कुछ ख्वाहिशों को आग लगाते हैं।
  • एक तो ये कातिल सर्दी, ऊपर से तेरी यादों की धुंध,<br/>
बेहाल कर रखा है, इश्क के मौसमों ने।
    एक तो ये कातिल सर्दी, ऊपर से तेरी यादों की धुंध,
    बेहाल कर रखा है, इश्क के मौसमों ने।
  • बारिश के बाद रात आईने सी थी,<br/>
एक पैर पानी में पड़ा, और चाँद हिल गया।
    बारिश के बाद रात आईने सी थी,
    एक पैर पानी में पड़ा, और चाँद हिल गया।