• मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,<br/>
ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।Upload to Facebook
    मेरे घर से मयखाना इतना करीब न था,
    ऐ दोस्त कुछ लोग दूर हुए तो मयखाना करीब आ गया।
  • तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;<br/>
वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।Upload to Facebook
    तेरी निगाह से ऐसी शराब पी मैंने, फिर न होश का दावा किया कभी मैंने;
    वो और होंगे जिन्हें मौत आ गई होगी, निगाह-ए-यार से पाई है जिन्दगी मैंने।
  • आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार,<br/>
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर।Upload to Facebook
    आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार,
    लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर।
    ~ Jaleel Manikpuri
  • ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,<br/>
छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।Upload to Facebook
    ऐ ज़ौक़ देख दुख़्तर-ए-रज़ को न मुँह लगा,
    छुटती नहीं है मुँह से ये काफ़र लगी हुई।
    ~ Sheikh Ibrahim Zauq
  • बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;<br/>
कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;<br/>
मजा तो तब है पीने का यारो;<br/>
इधर हम पियें और नशा उनको आये।Upload to Facebook
    बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये;
    कि वो आज नजरों से अपनी पिलायें;
    मजा तो तब है पीने का यारो;
    इधर हम पियें और नशा उनको आये।
  • पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,<br/>
कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।Upload to Facebook
    पहले शराब ज़ीस्त थी अब ज़ीस्त है शराब,
    कोई पिला रहा है पिए जा रहा हूँ मैं।
    ~ Jigar Moradabadi
  • पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';<br/>
बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।Upload to Facebook
    पीने से कर चुका था मैं तौबा मगर 'जलील';
    बादल का रंग देख के नीयत बदल गई।
    ~ Jaleel Manikpuri
  • नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;<br />
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।Upload to Facebook
    नशा पिला के गिराना तो सब को आता है;
    मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी।
    ~ Allama Iqbal
  • हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;<br />
वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;<br />
कल वो कह गए भुला दो हमको;<br />
हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।Upload to Facebook
    हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर;
    वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर;
    कल वो कह गए भुला दो हमको;
    हमने पूछा कैसे, वो चले गए हाथों मे जाम देकर।
  • तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;<br />
यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।Upload to Facebook
    तेरे होठों में भी क्या खूब नशा मिला;
    यूँ लगता है तेरे जूठे पानी से ही शराब बनती है।