• शिकायत तो आज भी मुझे खुद से है,<br/>
खैर तुमसे तो इश्क़ ही रहेगा!
    शिकायत तो आज भी मुझे खुद से है,
    खैर तुमसे तो इश्क़ ही रहेगा!
  • कई ज़रिये हैं कुछ कहने के,<br/>
उनमें से एक जरिया है कुछ ना कहना!
    कई ज़रिये हैं कुछ कहने के,
    उनमें से एक जरिया है कुछ ना कहना!
  • क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है; <br/>
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है!
    क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है;
    हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है!
    ~ Jigar Moradabadi
  • गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;<br/>
यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं रूके रास्तों की तरह!
    गुज़र जाते हैं खूबसूरत लम्हें यूँ ही मुसाफिरों की तरह;
    यादें वहीं खड़ी रह जाती हैं रूके रास्तों की तरह!
  • अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,<br/>
गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
    अगर तुम ना होते, तो टूट के बिखर जाते,
    गर तुम पास होते, तो इतना भी ना टूटते!
  • न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;<br/>
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
    न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम;
    रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम!
  • हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,<br/>
जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!
    हमसे खेलती रही दुनिया ताश के पत्तों की तरह,
    जिसने जीता उसने भी फेंका और जो हारा उसने भी फेंका!
  • गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता  नहीं;<br/>
लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
    गज़ब की धूप है इस शहर में फिर भी पता नहीं;
    लोगों के दिल यहाँ, पिघलते क्यों नहीं।
  • क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;<br/>
बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    क्यों डरे कि ज़िन्दग़ी में क्या होगा, हर वक़्त क्यों सोचे कि बुरा होगा;
    बढ़ते रहे बस मंज़िलो की ओर, हमे कुछ मिले या ना मिले, तज़ुर्बा तो नया होगा!
    ~ Javed Akhtar
  • परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;<br/>
हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!
    परख से कब जाहिर हुई शख्सियत किसी की;
    हम तो बस उन्हीं के हैं, जिन्हें हम पर यकीन है!