• कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;<br/>
याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
    कौन पूछता है पिंजरे में बंद 'परिंदों' को ग़ालिब;
    याद वही आते हैं उड़ जाते हैं!
  • ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;<br/>
कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
    ख़्वाबों की ज़मीन पर रखा था पाँव छिल गया;
    कौन कहता है ख्वाब मखमली होते हैं!
  • ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;<br/>
ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
    ये किस अंदाज में तुमने मेरी मोहब्बत का सौदा किया;
    ना दूसरों के लायक छोड़ा ना खुद का होने दिया!
  • अभी तो साथ चलना है, समंदर की मुसाफत में,<br/>
किनारे पर ही देखेंगे, किनारा कौन करता है।
    अभी तो साथ चलना है, समंदर की मुसाफत में,
    किनारे पर ही देखेंगे, किनारा कौन करता है।
  • माँगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की;<br/>
शर्मिंदा आज तक हैं मियाँ ज़िंदगी से हम!
    माँगी थी एक बार दुआ हम ने मौत की;
    शर्मिंदा आज तक हैं मियाँ ज़िंदगी से हम!
  • दिल के रिश्ते हैं बस किस्मत से बनते हैं;<br/>
वरना मुलाक़ात तो हज़ारों से होती हैं!
    दिल के रिश्ते हैं बस किस्मत से बनते हैं;
    वरना मुलाक़ात तो हज़ारों से होती हैं!
  • रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;<br/>
क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
    रिश्तों को जेबों में नहीं हुजूर दिलों में रखिये;
    क्योंकि वक्त से शातिर कोई जेब कतरा नहीं होता!
  • बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं;<br/>
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं!
    बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं;
    तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;<br/>
दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    दिल की बेताबी नहीं ठहरने देती है मुझे;
    दिन कहीं रात कहीं सुब्ह कहीं शाम कहीं!
    ~ Nazeer Akbarabadi
  • इंतजार, इज़हार, इबादत सब तो किया मैंने;<br/>
कैसे बताऊं कि तुमसे इश्क़ कितना किया मैंने!
    इंतजार, इज़हार, इबादत सब तो किया मैंने;
    कैसे बताऊं कि तुमसे इश्क़ कितना किया मैंने!