• कोई कब तक एक नाम दिन-रात पुकारे?<br/>
शाम उतर आई खिड़की में बिना तुम्हारे!
    कोई कब तक एक नाम दिन-रात पुकारे?
    शाम उतर आई खिड़की में बिना तुम्हारे!
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • तू अपनी रफ्तार पे इतना ना इतरा,ऐ जिंदगी;<br/>
अगर मैंने रोक ली साँस तो, तू भी चल नही पायेगी!
    तू अपनी रफ्तार पे इतना ना इतरा,ऐ जिंदगी;
    अगर मैंने रोक ली साँस तो, तू भी चल नही पायेगी!
  • ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,<br/>
मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!
    ज़िंदगी सब्र के अलावा कुछ भी नहीं है,
    मैंने हर शख़्स को यहाँ ख़ुशियों का इंतजार करते देखा है!
  • एक दिन भी ना निभा सकेंगे मेरा किरदार;<br/>
वो लोग जो मुझे मशवरे हजार देते हैं!
    एक दिन भी ना निभा सकेंगे मेरा किरदार;
    वो लोग जो मुझे मशवरे हजार देते हैं!
  • हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे,<br/>
लफ़्ज़ कागज़ पर उतर जादूगरी करने लगे;<br/>
क़ामयाबी जिसने पाई उनके घर तो बस गये,<br/>
जिनके दिल टूटे वो आशिक़ शायरी करने लगे!
    हादसे इंसान के संग मसखरी करने लगे,
    लफ़्ज़ कागज़ पर उतर जादूगरी करने लगे;
    क़ामयाबी जिसने पाई उनके घर तो बस गये,
    जिनके दिल टूटे वो आशिक़ शायरी करने लगे!
  • ना जन्नत में, ना ख्यालों में, ना ही किसी जमाने में;<br/>
सुकून दिल को मिलता है हमें तुमसे नजरें मिलाने में!
    ना जन्नत में, ना ख्यालों में, ना ही किसी जमाने में;
    सुकून दिल को मिलता है हमें तुमसे नजरें मिलाने में!
  • कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए;<br/>
मैं सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए!
    कुछ कह गए, कुछ सह गए, कुछ कहते कहते रह गए;
    मैं सही तुम गलत के खेल में, न जाने कितने रिश्ते ढह गए!
  • चुपचाप चल रहे थे ज़िन्दगी के सफर में;<br/>
तुम पर नज़र पड़ी और गुमराह हो गए!
    चुपचाप चल रहे थे ज़िन्दगी के सफर में;
    तुम पर नज़र पड़ी और गुमराह हो गए!
  • क़र्ज़ होता तो उतार भी देते,<br/>
कम्बख्त इश्क़ था चढ़ा रहा!
    क़र्ज़ होता तो उतार भी देते,
    कम्बख्त इश्क़ था चढ़ा रहा!
  • दुनिया की क्या मजाल देता हमें कोई फरेब;<br/>
अपनी ही आरजू के हुए हम शिकार हैं!
    दुनिया की क्या मजाल देता हमें कोई फरेब;
    अपनी ही आरजू के हुए हम शिकार हैं!