• इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;<br/>
कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
    इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;
    कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
  • अजल भी टल गई देखी गई हालत न आँखों से;<br/>
शब-ए-ग़म में मुसीबत सी मुसीबत हम ने झेली है!
    अजल भी टल गई देखी गई हालत न आँखों से;
    शब-ए-ग़म में मुसीबत सी मुसीबत हम ने झेली है!
    ~ Shad Azeembadi
  • मुझे क़ुबूल ही नहीं दूसरा इश्क़ हरगिज़;

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मेरे सीने में इश्क़-ए-मोहम्मद हने दो!
    मुझे क़ुबूल ही नहीं दूसरा इश्क़ हरगिज़;
    मेरे सीने में इश्क़-ए-मोहम्मद हने दो!
  • अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;<br/>
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;
    रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    ~ Nida Fazli
  • आँख से आँख जब नहीं मिलती;<br/>
दिल से दिल हम-कलाम होता है!
    आँख से आँख जब नहीं मिलती;
    दिल से दिल हम-कलाम होता है!
    ~ Asrar ul Haq Majaz
  • मेरे अल्फ़ाज़ का जादू ज़माने की ज़बाँ पर है;<br/>
तुम्हारी साज़िशों की हर कहानी बेअसर निकली!
    मेरे अल्फ़ाज़ का जादू ज़माने की ज़बाँ पर है;
    तुम्हारी साज़िशों की हर कहानी बेअसर निकली!
  • मैंने पूछा कैसे जान जाते हो मेरे दिल की बातें,<br/>

वो बोली जब रूह में बसे हो फिर ये सवाल क्यूँ।
    मैंने पूछा कैसे जान जाते हो मेरे दिल की बातें,
    वो बोली जब रूह में बसे हो फिर ये सवाल क्यूँ।
  • आसाँ नहीं दरिया-ए-मोहब्बत से गुज़रना;<br/>
याँ नूह की कश्ती को भी तूफ़ान का डर है!
    आसाँ नहीं दरिया-ए-मोहब्बत से गुज़रना;
    याँ नूह की कश्ती को भी तूफ़ान का डर है!
  • आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने;<br/>
ग़फ़लत ज़रा न की मिरे ग़फ़लत-शिआर ने!
    आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने;
    ग़फ़लत ज़रा न की मिरे ग़फ़लत-शिआर ने!
  • खुदा से मिलती है सूरत मेरे महबूब की;<br/>
अपनी तो मोहब्बत भी हो जाती है और इबादत भी!
    खुदा से मिलती है सूरत मेरे महबूब की;
    अपनी तो मोहब्बत भी हो जाती है और इबादत भी!