• दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;<br/>
ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    दिल नाशिकेब, रूह परेशान, नज़र उदास;
    ये क्या बना दिया है तिरे इंतिज़ार ने!
    ~ Seemab Akbarabadi
  • सरकता जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता;<br/>
निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता-आहिस्ता!
    सरकता जाये है रुख से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता;
    निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता-आहिस्ता!
    ~ Ameer Minai
  • उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;<br/>
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    उठकर तो आ गये हैं तेरी बज़्म से मगर;
    कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आये हैं!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';<br/>
जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
    इश्क पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब';
    जो लगाये न लगे और बुझाये न बने!
    ~ Mirza Ghalib
  • वो कभी मिल जाये मुझको अपनी साँसों के करीब;<br/>
होंठ को जुंबिश न दूँ और ग़ुफ्त-ग़ू सारी करूँ!
    वो कभी मिल जाये मुझको अपनी साँसों के करीब;
    होंठ को जुंबिश न दूँ और ग़ुफ्त-ग़ू सारी करूँ!
    ~ Zafar Gorakhpuri
  • नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;<br/>
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    नहीं निग़ाह में मंज़िल तो जुस्त-जू ही सही;
    नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही!
    ~ Faiz Ahmad Faiz
  • पूरा भी हो के जो कभी पूरा ना हो सका;<br/>
तेरी निगाह का वो तक़ाज़ा है आज तक!
    पूरा भी हो के जो कभी पूरा ना हो सका;
    तेरी निगाह का वो तक़ाज़ा है आज तक!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • माना उन तक पहुंचती नहीं तपिश हमारी;<br/>
मतलब ये तो नहीं कि, सुलगते नहीं हैं हम!
    माना उन तक पहुंचती नहीं तपिश हमारी;
    मतलब ये तो नहीं कि, सुलगते नहीं हैं हम!
  • हर शख्स गुनाहगार है कुदरत के कत्ल में;<br/>
ये हवाएं जहरीली यूँ ही नहीं हुई!
    हर शख्स गुनाहगार है कुदरत के कत्ल में;
    ये हवाएं जहरीली यूँ ही नहीं हुई!
  • मेरे ग़ुज़रे हुये तेवर अभी भूली नहीं दुनिया;<br/>
अभी बिख़री हुयी हैं हर तरफ़ परछाइयाँ मेरी!
    मेरे ग़ुज़रे हुये तेवर अभी भूली नहीं दुनिया;
    अभी बिख़री हुयी हैं हर तरफ़ परछाइयाँ मेरी!