• दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,<br/>
जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये।
    दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,
    जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये।
  • कोई पत्थर की मूरत है, किसी पत्थर में मूरत है,<br/>
हमने देख ली दुनिया, बहुत ही खूबसूरत है;<br/>
जमाना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर है ये,<br/>
तुझे मेरी जरूरत है, मुझे तेरी ज़रूरत है!
    कोई पत्थर की मूरत है, किसी पत्थर में मूरत है,
    हमने देख ली दुनिया, बहुत ही खूबसूरत है;
    जमाना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर है ये,
    तुझे मेरी जरूरत है, मुझे तेरी ज़रूरत है!
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • एक उम्र वो थी कि जादू में भी यक़ीन था;<br/>
एक उम्र ये है कि हक़ीक़त पर भी शक़ है।
    एक उम्र वो थी कि जादू में भी यक़ीन था;
    एक उम्र ये है कि हक़ीक़त पर भी शक़ है।
  • रूठूँगा अगर तुझसे तो इस कदर रूठूँगा कि,<br/>
ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी।
    रूठूँगा अगर तुझसे तो इस कदर रूठूँगा कि,
    ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी।
  • तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ,<br/>
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ,<br/>
तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,<br/>
तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ!
    तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ,
    तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ,
    तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन,
    तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ!
    ~ Dr. Kumar Vishwas
  • किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो,<br/>
जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते।
    किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो,
    जिस्म से रूह को लेने फ़रिश्ते नहीं आते।
  • जरा तमीज़ से बटोरना बुझे दियों को दोस्तों,<br/>
इन्होंने कल अमावस की अन्धेरी रात में हमें रौशनी दी थी;<br/>
किसी और को जलाकर खुश होना अलग बात है,<br/>
इन्होंने तो ख़ुद को जलाकर हमें ख़ुशी दी थी।
    जरा तमीज़ से बटोरना बुझे दियों को दोस्तों,
    इन्होंने कल अमावस की अन्धेरी रात में हमें रौशनी दी थी;
    किसी और को जलाकर खुश होना अलग बात है,
    इन्होंने तो ख़ुद को जलाकर हमें ख़ुशी दी थी।
  • गिर कर उठने तक तो हाथ पकड़े रखा उसने मेरा,<br/>
जरा सँभल कर चलना सीखा तो फिर से खो गए भीड़ में!
    गिर कर उठने तक तो हाथ पकड़े रखा उसने मेरा,
    जरा सँभल कर चलना सीखा तो फिर से खो गए भीड़ में!
  • आशिक़ था एक मेरे अंदर, कुछ साल पहले गुज़र गया;<br/>
अब कोई शायर सा है, अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है!
    आशिक़ था एक मेरे अंदर, कुछ साल पहले गुज़र गया;
    अब कोई शायर सा है, अज़ीब-अज़ीब सी बातें करता है!
  • क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;<br/>
उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!
    क्या जाने किसी की प्यास बुझाने किधर गयीं;
    उस सिर पे झूम के जो घटाएँ गुज़र गयीं!
    ~ Kaifi Azmi