• उदास आँखों में अपनी करार देखा है,<br/>
पहली बार उसे बेक़रार देखा है;<br/>
जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की,
उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
    उदास आँखों में अपनी करार देखा है,
    पहली बार उसे बेक़रार देखा है;
    जिसे खबर ना होती थी मेरे आने-जाने की, उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है!
  • मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;<br/>
किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
    मेरे फन को तराशा है सभी के नेक इरादों ने;
    किसी की बेवफाई ने, किसी के झूठे वादों ने।
  • गर मर जाए एहसास किसी की रूह से बेवक्त,<br/>
ज़िंदगी की तल्ख़ हक़ीक़त से आदमी रू-ब-रू होता है!
    गर मर जाए एहसास किसी की रूह से बेवक्त,
    ज़िंदगी की तल्ख़ हक़ीक़त से आदमी रू-ब-रू होता है!
  • कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,<br/>
दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!<br/><br/>


सरजमीं  =  पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    कहाँ दूर हट के जायें, हम दिल की सरजमीं से,
    दोनों जहान की सैरें, हासिल हैं सब यहीं से!

    सरजमीं = पृथ्वी, जमीन, देश, मुल्क
    ~ Jigar Moradabadi
  • ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;<br/>
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;
    मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • देखकर पलकें मेरी कहने लगा कोई फक़ीर,<br/>
इन पे बरख़ुरदार सपनों का वज़न कुछ कम करो!
    देखकर पलकें मेरी कहने लगा कोई फक़ीर,
    इन पे बरख़ुरदार सपनों का वज़न कुछ कम करो!
  • किसी के पास होने का जब हर वक़्त एहसास होता है;<br/>
यक़ीं मानों कि यहीं मोहब्बत का आगाज होता है!
    किसी के पास होने का जब हर वक़्त एहसास होता है;
    यक़ीं मानों कि यहीं मोहब्बत का आगाज होता है!
  • रेत की दीवार हूँ गिरने से बचा ले मुझको;<br/>
यूँ न कर तेज़ हवाओं के हवाले मुझको;<br/>
आ मेरे पास ज़रा देख मोहब्बत से मुझे;<br/>
मैं बुरा हूँ तो भलाई से निभा ले मुझको!
    रेत की दीवार हूँ गिरने से बचा ले मुझको;
    यूँ न कर तेज़ हवाओं के हवाले मुझको;
    आ मेरे पास ज़रा देख मोहब्बत से मुझे;
    मैं बुरा हूँ तो भलाई से निभा ले मुझको!
  • ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना,<br/>
थी आरजू तेरे दर पे सुबह-ओ-शाम करें!<br/><br/>


ग़म-ए-हयात  =  ज़िन्दगी का ग़म
    ग़म-ए-हयात ने आवारा कर दिया वर्ना,
    थी आरजू तेरे दर पे सुबह-ओ-शाम करें!

    ग़म-ए-हयात = ज़िन्दगी का ग़म
    ~ Majrooh Sultanpuri
  • यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी;<br/>
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी।
    यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी;
    मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी।