• ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो;<br/>
ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है |
    ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो;
    ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है |
  • कह के आ गए उनसे कि जी लेंगे तुम्हारी बिन,<br/>
उनके जुदा होते ही जान पे बन आई है।
    कह के आ गए उनसे कि जी लेंगे तुम्हारी बिन,
    उनके जुदा होते ही जान पे बन आई है।
  • दूरियों की ना परवाह कीजिये,<br/>
दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये,<br/>
कहीं दूर नहीं हैं हम आपसे,<br/>
बस अपनी पलकों को आँखों से मिला लीजिये।
    दूरियों की ना परवाह कीजिये,
    दिल जब भी पुकारे बुला लीजिये,
    कहीं दूर नहीं हैं हम आपसे,
    बस अपनी पलकों को आँखों से मिला लीजिये।
  • उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर न उठाना लोगो,<br/>
जिसको शक हो वो मुझसे निबाह कर देखे।
    उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर न उठाना लोगो,
    जिसको शक हो वो मुझसे निबाह कर देखे।
  • शायद वो अपना वजूद छोड़ गया है मेरी हस्ती में,<br/>

यूँ सोते-सोते जाग जाना मेरी आदत पहले कभी न थी।
    शायद वो अपना वजूद छोड़ गया है मेरी हस्ती में,
    यूँ सोते-सोते जाग जाना मेरी आदत पहले कभी न थी।
  • खुद को समेट के खुद मे सीमट जाते है हम;<br/>
जब तेरी याद आती है फिर से बिखर जाते है हम!
    खुद को समेट के खुद मे सीमट जाते है हम;
    जब तेरी याद आती है फिर से बिखर जाते है हम!
  • खरीद पाऊँ खुशियाँ उदास चेहरों के लिए;<br/> 
मेरे किरदार का मोल इतना करदे खुदा!
    खरीद पाऊँ खुशियाँ उदास चेहरों के लिए;
    मेरे किरदार का मोल इतना करदे खुदा!
  • सजा न दे मुझे बेक़सूर हूँ मैं,<br/>
थाम ले मुझको ग़मों से चूर हूँ मैं,<br/>
तेरी दूरी ने कर दिया है पागल मुझे,<br/>
और लोग कहते हैं कि मगरूर हूँ मैं।
    सजा न दे मुझे बेक़सूर हूँ मैं,
    थाम ले मुझको ग़मों से चूर हूँ मैं,
    तेरी दूरी ने कर दिया है पागल मुझे,
    और लोग कहते हैं कि मगरूर हूँ मैं।
  • फ़िक्र-ए-रोज़गार ने फासले बढा दिए वरना;<br/>
सब यार एक साथ थे, अभी कल ही की तो बात है!
    फ़िक्र-ए-रोज़गार ने फासले बढा दिए वरना;
    सब यार एक साथ थे, अभी कल ही की तो बात है!
  • देख कर मेरी आँखें, एक फकीर कहने लगा;<br/>
पलकें तुम्हारी नाज़ुक है खवाबों का वज़न कम कीजिये!
    देख कर मेरी आँखें, एक फकीर कहने लगा;
    पलकें तुम्हारी नाज़ुक है खवाबों का वज़न कम कीजिये!