• आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए;<br/>
वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है!
    आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए;
    वर्ना ये उम्र भर का सफ़र राएगाँ तो है!
    ~ Munir Niazi
  • पूरी तरह से जीना कब का भूल चूका हूँ मैं, <br/>
कुछ तुम में जिन्दा हूँ कूछ खुद मे बाकी हूँ मैं।
    पूरी तरह से जीना कब का भूल चूका हूँ मैं,
    कुछ तुम में जिन्दा हूँ कूछ खुद मे बाकी हूँ मैं।
  • फिजाओं से उलझ कर एक हसीं यह राज़ जाना हैं;<br/>
जिसे कहतें हैं मोहब्बत वह नशा ही कातिलाना है!
    फिजाओं से उलझ कर एक हसीं यह राज़ जाना हैं;
    जिसे कहतें हैं मोहब्बत वह नशा ही कातिलाना है!
  • जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;<br/>
मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    जिधर जाते हैं सब जाना उधर अच्छा नहीं लगता;
    मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता!
    ~ Javed Akhtar
  • इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;<br/>
कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
    इन बादलो का मिजाज मेरे मेहबूब से बहुत मिलता है;
    कभी टूट के बरसते है, कभी बेरुखी से गुजर जाते है!
  • अजल भी टल गई देखी गई हालत न आँखों से;<br/>
शब-ए-ग़म में मुसीबत सी मुसीबत हम ने झेली है!
    अजल भी टल गई देखी गई हालत न आँखों से;
    शब-ए-ग़म में मुसीबत सी मुसीबत हम ने झेली है!
    ~ Shad Azeembadi
  • मुझे क़ुबूल ही नहीं दूसरा इश्क़ हरगिज़;

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मेरे सीने में इश्क़-ए-मोहम्मद हने दो!
    मुझे क़ुबूल ही नहीं दूसरा इश्क़ हरगिज़;
    मेरे सीने में इश्क़-ए-मोहम्मद हने दो!
  • अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;<br/>
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं;
    रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं!
    ~ Nida Fazli
  • आँख से आँख जब नहीं मिलती;<br/>
दिल से दिल हम-कलाम होता है!
    आँख से आँख जब नहीं मिलती;
    दिल से दिल हम-कलाम होता है!
    ~ Asrar ul Haq Majaz
  • मेरे अल्फ़ाज़ का जादू ज़माने की ज़बाँ पर है;<br/>
तुम्हारी साज़िशों की हर कहानी बेअसर निकली!
    मेरे अल्फ़ाज़ का जादू ज़माने की ज़बाँ पर है;
    तुम्हारी साज़िशों की हर कहानी बेअसर निकली!