• या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;<br/>
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!
    या हाथों हाथ लो मुझे मानिंद-ए-जाम-ए-मय;
    या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ!
    ~ Meer Taqi Meer
  • मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;<BR/>
उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!
    मोहबबत में नहीं है फ़र्क जी ने और मरने का;
    उसी को देख कर जीते हैं जिस क़ाफ़िर पे दम निकले!
    ~ Mirza Ghalib
  • याददाश्त का कमज़ोर होना बुरी बात नहीं है जनाब;<br/>
बड़े बेचैन रहते है वो लोग जिन्हे हर बात याद रहती है!
    याददाश्त का कमज़ोर होना बुरी बात नहीं है जनाब;
    बड़े बेचैन रहते है वो लोग जिन्हे हर बात याद रहती है!
  • झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है,<br/>
सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं!
    झूठ कहूँ तो लफ़्ज़ों का दम घुटता है,
    सच कहूँ तो लोग खफा हो जाते हैं!
  • दम भर मेरे पहलू में उन्हें चैन कहाँ है;<br/>
बैठे, कि बहाने से किसी काम से उठे!
    दम भर मेरे पहलू में उन्हें चैन कहाँ है;
    बैठे, कि बहाने से किसी काम से उठे!
    ~ Bekhud Dehlvi
  • शाम-ए-ग़म कुछ उस निग़ाह-ए-नाज़ की बातें करो;<br/>
बेखुदी बढ़ती चली है, राज़ की बातें करो!
    शाम-ए-ग़म कुछ उस निग़ाह-ए-नाज़ की बातें करो;
    बेखुदी बढ़ती चली है, राज़ की बातें करो!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त;<br/>
आह अब मुझ से तेरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं!
    मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त;
    आह अब मुझ से तेरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं!
    ~ Firaq Gorakhpuri
  • बहुत शौक था मुझे सबको जोडकर रखने का,<br/>
होश तब आया जब खुद के वजूद के टुकडे हो गये।
    बहुत शौक था मुझे सबको जोडकर रखने का,
    होश तब आया जब खुद के वजूद के टुकडे हो गये।
  • आगे आती थी हाल-ए-दिल पर हंसी;<br/>
अब किसी बात पर नहीं आती!
    आगे आती थी हाल-ए-दिल पर हंसी;
    अब किसी बात पर नहीं आती!
    ~ Mirza Ghalib
  • कुछ सोच के इक राह-ए-पुर-ख़ार से गुज़रा था;<br/>
काँटे भी न रास आए दामन भी न काम आया!
    कुछ सोच के इक राह-ए-पुर-ख़ार से गुज़रा था;
    काँटे भी न रास आए दामन भी न काम आया!
    ~ Nushur Wahidi