• इक ख़त कमीज़ में उसके नाम का क्या रखा;<br/>
क़रीब से गुज़रा हर शख्स पूछता है कौन सा इत्र है जनाब!
    इक ख़त कमीज़ में उसके नाम का क्या रखा;
    क़रीब से गुज़रा हर शख्स पूछता है कौन सा इत्र है जनाब!
  • ना मुस्कुराने को जी चाहता है;<br/>
ना आंसू बहाने को जी चाहता है;<br/>
लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में;<br/>
बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है!
    ना मुस्कुराने को जी चाहता है;
    ना आंसू बहाने को जी चाहता है;
    लिखूं तो क्या लिखूं तेरी याद में;
    बस तेरे पास लौट आने को जी चाहता है!
  • तुम हंसो तो दिन, चुप रहो तो रातें हैं;<br/>
किस का ग़म, कहाँ का ग़म, सब फज़ूल बातें हैं!
    तुम हंसो तो दिन, चुप रहो तो रातें हैं;
    किस का ग़म, कहाँ का ग़म, सब फज़ूल बातें हैं!
  • एक मैं हूँ, किया ना कभी सवाल कोई;<br/>
एक तुम हो, जिसका कोई जवाब नहीं!
    एक मैं हूँ, किया ना कभी सवाल कोई;
    एक तुम हो, जिसका कोई जवाब नहीं!
  • वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई गम छुपा रहे थे;<br/>
बारिश में भीग के आये थे मिलने, शायद वो आँसू छुपा रहे थे!
    वो इस तरह मुस्कुरा रहे थे, जैसे कोई गम छुपा रहे थे;
    बारिश में भीग के आये थे मिलने, शायद वो आँसू छुपा रहे थे!
  • इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है;<br/>
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!
    इस दुनिया में अजनबी रहना ही ठीक है;
    लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर!
  • कितना खुशनुमा होगा वो मेरे इँतज़ार का मंजर भी;<br/>
जब ठुकराने वाले मुझे फिर से पाने के लिये आँसु बहायेंगे!
    कितना खुशनुमा होगा वो मेरे इँतज़ार का मंजर भी;
    जब ठुकराने वाले मुझे फिर से पाने के लिये आँसु बहायेंगे!
  • ख़ाली नहीं रहा कभी आँखों का ये मकान,<br/>

सब अश्क़ बाहर गये तो उदासी ठहर गयी।
    ख़ाली नहीं रहा कभी आँखों का ये मकान,
    सब अश्क़ बाहर गये तो उदासी ठहर गयी।
  • कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,<br/>

जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।
    कहाँ-कहाँ से इकट्ठा करूँ, ऐ ज़िंदगी तुझको,
    जिधर भी देखूँ, तू ही तू बिखरी पड़ी है।
  • उन्होंने कहा, बहुत बोलते हो, अब क्या बरस जाओगे;<br/>
हमने कहा, चुप हो गए तो तुम तरस जाओगे!
    उन्होंने कहा, बहुत बोलते हो, अब क्या बरस जाओगे;
    हमने कहा, चुप हो गए तो तुम तरस जाओगे!