• 'इंसान' एक दुकान है, और 'जुबान' उसका ताला;<br />
जब ताला खुलता है, तभी मालुम पड़ता है;<br />
कि दूकान 'सोने' कि है, या 'कोयले' की!
    'इंसान' एक दुकान है, और 'जुबान' उसका ताला;
    जब ताला खुलता है, तभी मालुम पड़ता है;
    कि दूकान 'सोने' कि है, या 'कोयले' की!
  • आपको कौन मिलता है, यह समय तय करता है!<br />
आप उनमें से किसका साथ चाहते हैं, यह आप तय करते हैं!<br />
और उनमें से कौन आपके साथ रहता है, यह आपका व्यहार तय करता है!
    आपको कौन मिलता है, यह समय तय करता है!
    आप उनमें से किसका साथ चाहते हैं, यह आप तय करते हैं!
    और उनमें से कौन आपके साथ रहता है, यह आपका व्यहार तय करता है!
  • स्वास्थ्य सबसे बड़ी दौलत है! संतोष सबसे बड़ा खजाना है! आत्म -विश्वास सबसे बड़ा मित्र है!
    स्वास्थ्य सबसे बड़ी दौलत है! संतोष सबसे बड़ा खजाना है! आत्म -विश्वास सबसे बड़ा मित्र है!
  • अंधकार से कभी अंधकार को मिटाया नहीं जा सकता;<br />
सिर्फ प्रकाश ही ऐसा कर सकता है!<br />
इसी प्रकार नफरत से नफरत को नहीं मिटाया जा सकता;<br />
सिर्फ प्यार से ऐसा ऐसा किया जा सकता है!
    अंधकार से कभी अंधकार को मिटाया नहीं जा सकता;
    सिर्फ प्रकाश ही ऐसा कर सकता है!
    इसी प्रकार नफरत से नफरत को नहीं मिटाया जा सकता;
    सिर्फ प्यार से ऐसा ऐसा किया जा सकता है!
  • इंसान को बदाम खाने से नहीं;<br />
जिंदगी में ठोकर खाने से अक्ल आती है!
    इंसान को बदाम खाने से नहीं;
    जिंदगी में ठोकर खाने से अक्ल आती है!
  • अच्छी आदतों को अपनाना मुशकिल है;<br />
लेकिन उनके साथ जीना आसान है!<br />
बुरे आदतें अपनाना आसान है;<br />
लेकिन उनके साथ जीना मुशकिल है!
    अच्छी आदतों को अपनाना मुशकिल है;
    लेकिन उनके साथ जीना आसान है!
    बुरे आदतें अपनाना आसान है;
    लेकिन उनके साथ जीना मुशकिल है!
  • शाम सूरज को ढलना सिखाती है;<br />
शमा परवाने को जलना सिखाती है;<br />
गिरने वालों को तकलीफ तो होती है;<br />
लेकिन ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है!
    शाम सूरज को ढलना सिखाती है;
    शमा परवाने को जलना सिखाती है;
    गिरने वालों को तकलीफ तो होती है;
    लेकिन ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है!
  • जिंदगी दो दिन की है!<br />
एक दिन आप के हक़ में और एक दिन आप के खिलाफ!<br />
जिस दिन हक़ में हो, 'गरूर' मत करना;<br />
और जिस दिन हक़ में हो, थोड़ा, 'सब्र' जरूर करना!
    जिंदगी दो दिन की है!
    एक दिन आप के हक़ में और एक दिन आप के खिलाफ!
    जिस दिन हक़ में हो, 'गरूर' मत करना;
    और जिस दिन हक़ में हो, थोड़ा, 'सब्र' जरूर करना!
  • जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधो पर जी जाती है;<br />
दूसरों के कंधो पर तो सिर्फ जनाजे उठा करते हैं!
    जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधो पर जी जाती है;
    दूसरों के कंधो पर तो सिर्फ जनाजे उठा करते हैं!
  • बुराई इसलिए नहीं पनपती की बुरा करने वाले लोग बढ़ गये हैं;<br />
बल्कि इसलिए बढ़ती है, कि सहन करने वाले लोग बढ़ गये हैं!
    बुराई इसलिए नहीं पनपती की बुरा करने वाले लोग बढ़ गये हैं;
    बल्कि इसलिए बढ़ती है, कि सहन करने वाले लोग बढ़ गये हैं!