• ज़िंदगी की तपिश को सहन कीजिये जनाब,<br/>
अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती हैं!
    ज़िंदगी की तपिश को सहन कीजिये जनाब,
    अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती हैं!
  • आपकी बचकानी हरकतें ही आपको जिंदा-दिल रखती है...<br/>
वरना...समझदारी का दूसरा नाम बुढापा है!
    आपकी बचकानी हरकतें ही आपको जिंदा-दिल रखती है...
    वरना...समझदारी का दूसरा नाम बुढापा है!
  • कोरोना मोहब्बत की तरह है, आपको पता भी नहीं चलेगा कब हो गया!
    कोरोना मोहब्बत की तरह है, आपको पता भी नहीं चलेगा कब हो गया!
  • बचपन की यादें:<br/>
बचपन में पेन की रिफिल खरीदकर लाते थे!<br/>
पहली बार थोड़ी से काटकर पेन में डालते थे, जब ज्यादा कट जाती थी, पीछे कागज़ डालते थे!
    बचपन की यादें:
    बचपन में पेन की रिफिल खरीदकर लाते थे!
    पहली बार थोड़ी से काटकर पेन में डालते थे, जब ज्यादा कट जाती थी, पीछे कागज़ डालते थे!
  • इस दुनिया का कोई `रंग` नहीं, कोई `ढंग` नहीं!<br/>
पैसा पास हैं तो सब कुछ हैं, वरना कोई `संग` नहीं!
    इस दुनिया का कोई "रंग" नहीं, कोई "ढंग" नहीं!
    पैसा पास हैं तो सब कुछ हैं, वरना कोई "संग" नहीं!
  • बेशक पलट के देखो वह बीता हुआ कल है;<br/>
पर बढ़ना तो उधर ही है जहाँ आने वाला कल है।
    बेशक पलट के देखो वह बीता हुआ कल है;
    पर बढ़ना तो उधर ही है जहाँ आने वाला कल है।
  • बचपन में भाई बहन दिन में 5 बार नाराज़ होते थे और राज़ी हो जाते थे!<br/>
अब बड़े होकर एक बार नाराज़ हो जायें तो फिर शायद सीधे जनाज़े पर मिलते हैं!
    बचपन में भाई बहन दिन में 5 बार नाराज़ होते थे और राज़ी हो जाते थे!
    अब बड़े होकर एक बार नाराज़ हो जायें तो फिर शायद सीधे जनाज़े पर मिलते हैं!
  • संसार में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसका ज़हर उसके दांतों में नहीं उसकी बातों में है!
    संसार में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जिसका ज़हर उसके दांतों में नहीं उसकी बातों में है!
  • मैं एक मामूली सा ख्याल हूँ,<br/>
कभी याद आऊं तो मुस्कुरा देना!
    मैं एक मामूली सा ख्याल हूँ,
    कभी याद आऊं तो मुस्कुरा देना!
  • जो लोग मेरे दिल में रहते हैं!<br/>
किराया दे दो प्लीज!
    जो लोग मेरे दिल में रहते हैं!
    किराया दे दो प्लीज!