• नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता;<br/>
फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता;<br/>
ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है;<br/>
यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता।Upload to Facebook
    नज़र नवाज़ नज़रों में ज़ी नहीं लगता;
    फ़िज़ा गई तो बहारों में ज़ी नहीं लगता;
    ना पूछ मुझसे तेरे ग़म में क्या गुजरती है;
    यही कहूंगा हज़ारों में ज़ी नहीं लगता।
  • हर किसी के नसीब में सच्चा प्यार नहीं होता;<br/>
सब किस्मत का खेल है,<br/>
किसी का कोई दोष नहीं होता;<br/>
मेरे नसीब में सिर्फ तड़प, जुदाई, और नफरत ही बची है, अब खुश रह नहीं होता।Upload to Facebook
    हर किसी के नसीब में सच्चा प्यार नहीं होता;
    सब किस्मत का खेल है,
    किसी का कोई दोष नहीं होता;
    मेरे नसीब में सिर्फ तड़प, जुदाई, और नफरत ही बची है, अब खुश रह नहीं होता।
  • पलकों के किनारे हमने भिगोए ही नहीं;<br/>
वो सोचते हैं हम रोए ही नहीं;<br/>
वो पूछते हैं कि ख़्वाबों में किसे देखते हो;<br/>
हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं।Upload to Facebook
    पलकों के किनारे हमने भिगोए ही नहीं;
    वो सोचते हैं हम रोए ही नहीं;
    वो पूछते हैं कि ख़्वाबों में किसे देखते हो;
    हम हैं कि एक उम्र से सोए ही नहीं।
  • सुन लिया हम ने फैसला तेरा;<br/>
और सुन के उदास हो बैठे;<br/>
ज़हन चुप चाप आँख खाली;<br/>
जैसे हम क़ायनात खो बैठे।Upload to Facebook
    सुन लिया हम ने फैसला तेरा;
    और सुन के उदास हो बैठे;
    ज़हन चुप चाप आँख खाली;
    जैसे हम क़ायनात खो बैठे।
  • ये इश्क़ वालों की क़िस्मत बुरी होती है;<br/>
हर मुलाक़ात जुदाई से जुडी होती है;<br/>
कहीं भी देख लेना आज़माकर;<br/>
सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है।Upload to Facebook
    ये इश्क़ वालों की क़िस्मत बुरी होती है;
    हर मुलाक़ात जुदाई से जुडी होती है;
    कहीं भी देख लेना आज़माकर;
    सच्चे प्यार को जुदाई ही नसीब होती है।
  • धोखा दिया था जब तूने मुझे;<br/>
जिंदगी से मैं नाराज था; <br/>
सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं;<br/>
मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था। Upload to Facebook
    धोखा दिया था जब तूने मुझे;
    जिंदगी से मैं नाराज था;
    सोचा कि दिल से तुझे निकाल दूं;
    मगर कंबख्त दिल भी तेरे पास था।
  • लम्हें जुदाई को बेकरार करते हैं;<br/>
हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;<br/>
आँखे मेरी पढ़ लो कभी;<br/>
हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
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    लम्हें जुदाई को बेकरार करते हैं;
    हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;
    आँखे मेरी पढ़ लो कभी;
    हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
  • जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है;<br/>
फिर हमें आराम कहाँ होता है;<br/>
हौंसला नहीं मुझमें तुम्हें भुला देने का;<br/>
काम सदियों का है यह, लम्हों में कहाँ होता है।Upload to Facebook
    जिस घड़ी तेरी यादों का समय होता है;
    फिर हमें आराम कहाँ होता है;
    हौंसला नहीं मुझमें तुम्हें भुला देने का;
    काम सदियों का है यह, लम्हों में कहाँ होता है।
  • लम्हें जुदाई के बेकरार करते हैं;<br/>
हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;<br/>
आँखें मेरी पढ़ लो कभी भी;<br/>
हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।Upload to Facebook
    लम्हें जुदाई के बेकरार करते हैं;
    हालात मेरे मुझे लाचार करते हैं;
    आँखें मेरी पढ़ लो कभी भी;
    हम खुद कैसे कहें कि आपसे प्यार करते हैं।
  • कितना चाहता हूँ तुझे यह मुझको पता नहीं; <br/>
मगर तुम्हारे सिवा कोई और दिल में बसा नहीं; <br/>
ज़माना दुश्मन हो गया चाहत का हमारी; <br/>
जुदा हो गए फिर से यह मेरी खता नहीं।
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    कितना चाहता हूँ तुझे यह मुझको पता नहीं;
    मगर तुम्हारे सिवा कोई और दिल में बसा नहीं;
    ज़माना दुश्मन हो गया चाहत का हमारी;
    जुदा हो गए फिर से यह मेरी खता नहीं।
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