• कर दिया है बेफिक्र तूने फ़िक्र अब मैं कैसे करूँ;<br/>
फ़िक्र तो यह है कि तेरा शुक्र कैसे करूँ।Upload to Facebook
    कर दिया है बेफिक्र तूने फ़िक्र अब मैं कैसे करूँ;
    फ़िक्र तो यह है कि तेरा शुक्र कैसे करूँ।
  • दुनिया विरोध करे तुम ङरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते हैं दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।Upload to Facebook
    दुनिया विरोध करे तुम ङरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते हैं दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।
  • समझदार वह व्यक्ति नहीं जो ईंट का जवाब पत्थर से दे।<br/>
समझदार वह है जो फेंकी हुई ईंट से अपना आशियाना बना ले।Upload to Facebook
    समझदार वह व्यक्ति नहीं जो ईंट का जवाब पत्थर से दे।
    समझदार वह है जो फेंकी हुई ईंट से अपना आशियाना बना ले।
  • होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये,<br/>
ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये,<br/>
ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,<br/>
धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये।Upload to Facebook
    होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिये,
    ज़िंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये,
    ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे,
    धीरे धीरे ही सही मगर राह पे चलते रहिये।
  • जो हो गया उसे सोचा नहीं करते;<br/>
जो मिल गया उसे खोया नहीं करते;<br/>
हासिल उन्हें ही होती है सफलता;<br/>
जो वक़्त और हालात पर रोया नहीं करते।Upload to Facebook
    जो हो गया उसे सोचा नहीं करते;
    जो मिल गया उसे खोया नहीं करते;
    हासिल उन्हें ही होती है सफलता;
    जो वक़्त और हालात पर रोया नहीं करते।
  • ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो या चाहे चार दिन की,<br/>
उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िंदगी तुम्हें नहीं मिली, ज़िंदगी को तुम मिले हो।Upload to Facebook
    ज़िंदगी चाहे एक दिन की हो या चाहे चार दिन की,
    उसे ऐसे जियो जैसे कि ज़िंदगी तुम्हें नहीं मिली, ज़िंदगी को तुम मिले हो।
  • हार और जीत हमारी सोंच पर निर्भर है।<br/>
मान लिया तो हार और अगर ठान लिया तो जीत।Upload to Facebook
    हार और जीत हमारी सोंच पर निर्भर है।
    मान लिया तो हार और अगर ठान लिया तो जीत।
  • रेहमत खुदा की तेरी चौखट पे बरसती नज़र आये;<br/>
हर लम्हा तेरी तक़दीर संवरती नज़र आये;<br/>
बिन मांगे तुझे मिले तू जो चाहे;<br/>
कर कुछ ऐसा काम कि दुआ खुद तेरे हाथों को तरसती नज़र आये।Upload to Facebook
    रेहमत खुदा की तेरी चौखट पे बरसती नज़र आये;
    हर लम्हा तेरी तक़दीर संवरती नज़र आये;
    बिन मांगे तुझे मिले तू जो चाहे;
    कर कुछ ऐसा काम कि दुआ खुद तेरे हाथों को तरसती नज़र आये।
  • सीढ़ियाँ उनके लिए बनी हैं, जिन्हें छत पर जाना है,<br/>
लेकिन जिनकी नज़र, आसमान पर हो उन्हें तो रास्ता ख़ुद बनाना है।Upload to Facebook
    सीढ़ियाँ उनके लिए बनी हैं, जिन्हें छत पर जाना है,
    लेकिन जिनकी नज़र, आसमान पर हो उन्हें तो रास्ता ख़ुद बनाना है।
  • कागज़ अपनी किस्मत से उड़ता है और पतंग अपनी क़ाबलियत से!<br/>
किस्मत साथ दे या ना दे मगर क़ाबलियत ज़रूर साथ देगी।Upload to Facebook
    कागज़ अपनी किस्मत से उड़ता है और पतंग अपनी क़ाबलियत से!
    किस्मत साथ दे या ना दे मगर क़ाबलियत ज़रूर साथ देगी।
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