• कुछ कर गुजरने के लिए, मौसम नहीं मन चाहिए;<br />
साधन सभी जुट जायेंगे, बस संकल्प का धन चाहिए।
    कुछ कर गुजरने के लिए, मौसम नहीं मन चाहिए;
    साधन सभी जुट जायेंगे, बस संकल्प का धन चाहिए।
  • भरोसा `खुदा` पर है तो जो लिखा है तक़दीर में वही पाओगे,<br />
भरोसा अगर `खुद` पर है तो खुदा वही लिखेगा जो आप चाहोगे।
    भरोसा "खुदा" पर है तो जो लिखा है तक़दीर में वही पाओगे,
    भरोसा अगर "खुद" पर है तो खुदा वही लिखेगा जो आप चाहोगे।
  • कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं,<br />
हारा वही जो कभी लड़ा नहीं।
    कोई लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं,
    हारा वही जो कभी लड़ा नहीं।
  • हौसला कम न होगा तेरा तूफानों के सामने,<br />
मेहनत को इबादत में बदल कर देख;<br />
खुद ब खुद हल होंगी ज़िन्दगी की मुश्किलें,<br />
बस ख़ामोशी को सवालों में बदल कर तो देख।
    हौसला कम न होगा तेरा तूफानों के सामने,
    मेहनत को इबादत में बदल कर देख;
    खुद ब खुद हल होंगी ज़िन्दगी की मुश्किलें,
    बस ख़ामोशी को सवालों में बदल कर तो देख।
  • अवसरों की राह देखने वाले व्यक्ति साधारण होते हैं;<br />
लेकिन असाधारण व्यक्ति अवसरों को जन्म देते हैं।
    अवसरों की राह देखने वाले व्यक्ति साधारण होते हैं;
    लेकिन असाधारण व्यक्ति अवसरों को जन्म देते हैं।
  • मंजिल पर पहुँचना है तो कभी राह के काँटों से मत घबराना,<br />
क्योंकि काँटे ही तो बढ़ाते हैं रफ़्तार हमारे क़दमों की।
    मंजिल पर पहुँचना है तो कभी राह के काँटों से मत घबराना,
    क्योंकि काँटे ही तो बढ़ाते हैं रफ़्तार हमारे क़दमों की।
  • बहता पानी ही पत्थरों पर निशान छोड़ता है,<br />
पर पत्थर पानी पर कोई निशान नहीं छोड़ता है,<br />
इसलिए कहते हैं चलने का नाम ज़िन्दगी है।
    बहता पानी ही पत्थरों पर निशान छोड़ता है,
    पर पत्थर पानी पर कोई निशान नहीं छोड़ता है,
    इसलिए कहते हैं चलने का नाम ज़िन्दगी है।
  • ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखाती है;<br />
कभी हँसती है तो कभी रुलाती है;<br />
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;<br />
ज़िन्दगी उनके आगे सिर झुकाती है।
    ज़िन्दगी बहुत कुछ सिखाती है;
    कभी हँसती है तो कभी रुलाती है;
    पर जो हर हाल में खुश रहते हैं;
    ज़िन्दगी उनके आगे सिर झुकाती है।
  • बैठ जाता हूँ अक्सर मिट्टी पर क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है;<br />
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीका चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना।
    बैठ जाता हूँ अक्सर मिट्टी पर क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है;
    मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीका चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना।
  • कोई साथ दे ना दे, तू चलना सीख ले;<br />
हर आग से हो जा वाकिफ तू जलना सीख ले;<br />
कोई रोक नहीं पायेगा बढ़ने से तुझे मंज़िल की तरफ;<br />
हर मुश्किल का सामना करना तू सीख ले।
    कोई साथ दे ना दे, तू चलना सीख ले;
    हर आग से हो जा वाकिफ तू जलना सीख ले;
    कोई रोक नहीं पायेगा बढ़ने से तुझे मंज़िल की तरफ;
    हर मुश्किल का सामना करना तू सीख ले।