• बंधी हैं हाथ पर सबके घड़ियाँ मगर,<br/>
पकड़ में किसी के एक लम्हा भी नहीं!<br/>
सुप्रभात!
    बंधी हैं हाथ पर सबके घड़ियाँ मगर,
    पकड़ में किसी के एक लम्हा भी नहीं!
    सुप्रभात!
  • अगर ये तय है कि जो दिया है, वो लौट के आएगा तो...<br/>
क्यों ना सिर्फ दुआएं ही दी जाएं!<br/>
सुप्रभात!
    अगर ये तय है कि जो दिया है, वो लौट के आएगा तो...
    क्यों ना सिर्फ दुआएं ही दी जाएं!
    सुप्रभात!
  • कोई ना कोई, तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे!<br/>
सुप्रभात!
    कोई ना कोई, तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे!
    सुप्रभात!
  • भगवान हर रूप में तुम्हारी मदद करने आते हैं!<br/>
तुम्हें सिर्फ उन्हें पहचानने की ज़रूरत है, खोजने की नहीं!<br/>
सुप्रभात!
    भगवान हर रूप में तुम्हारी मदद करने आते हैं!
    तुम्हें सिर्फ उन्हें पहचानने की ज़रूरत है, खोजने की नहीं!
    सुप्रभात!
  • अच्छे मित्र, अच्छे रिश्तेदार और अच्छे विचार; जिसके पास होते होते हैं!<br/>
उसे दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती!<br/>
सुप्रभात!
    अच्छे मित्र, अच्छे रिश्तेदार और अच्छे विचार; जिसके पास होते होते हैं!
    उसे दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती!
    सुप्रभात!
  • रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती,<br/>
खुशबू मौसम का इंतज़ार नहीं करती,<br/>
जो भी खुशी मिले उसका आनंद लिया करो,<br/>
क्योंकि ज़िन्दगी वक्त का इंतज़ार नही करती।<br/>
सुप्रभात!
    रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती,
    खुशबू मौसम का इंतज़ार नहीं करती,
    जो भी खुशी मिले उसका आनंद लिया करो,
    क्योंकि ज़िन्दगी वक्त का इंतज़ार नही करती।
    सुप्रभात!
  • सुबह का मौसम जैसे जन्नत का एहसास, आँखों में नींद और चाय की तलाश;<br/>
जागने की मज़बूरी, थोड़ा और सोने की आस;<br/>
पर आपका दिन शुभ हो हमारी सुप्रभात के साथ!
    सुबह का मौसम जैसे जन्नत का एहसास, आँखों में नींद और चाय की तलाश;
    जागने की मज़बूरी, थोड़ा और सोने की आस;
    पर आपका दिन शुभ हो हमारी सुप्रभात के साथ!
  • इंसान बुरा उस वक्त बनता है, जब वो खुद को दूसरों से अच्छा मानने लगता है!<br/>
सुप्रभात!
    इंसान बुरा उस वक्त बनता है, जब वो खुद को दूसरों से अच्छा मानने लगता है!
    सुप्रभात!
  • रिशता चाहे कोई भी हो, पासवर्ड एक ही है, `विश्वास`!<br/>
सुप्रभात!
    रिशता चाहे कोई भी हो, पासवर्ड एक ही है, "विश्वास"!
    सुप्रभात!
  • बहुत कुछ ऐसा था जो जीवन की भाग-दौड़ में छोड़ दिया;<br/>
फिर मालूम हुआ कि जो छोड़ा था, वो ही जीवन था।<br/>
सुप्रभात!
    बहुत कुछ ऐसा था जो जीवन की भाग-दौड़ में छोड़ दिया;
    फिर मालूम हुआ कि जो छोड़ा था, वो ही जीवन था।
    सुप्रभात!