• ज़िंदगी की तपिश को सहन कीजिये जनाब,<br/>
अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती हैं!
    ज़िंदगी की तपिश को सहन कीजिये जनाब,
    अक्सर वे पौधे मुरझा जाते हैं, जिनकी परवरिश छाया में होती हैं!
  • आपकी बचकानी हरकतें ही आपको जिंदा-दिल रखती है...<br/>
वरना...समझदारी का दूसरा नाम बुढापा है!
    आपकी बचकानी हरकतें ही आपको जिंदा-दिल रखती है...
    वरना...समझदारी का दूसरा नाम बुढापा है!
  • दुनिया के सारे दुःख एक तरफ और...<br/>
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उसी तरफ मैं! ऐसी ही है ज़िन्दगी!
    दुनिया के सारे दुःख एक तरफ और...
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    उसी तरफ मैं! ऐसी ही है ज़िन्दगी!
  • कोरोना मोहब्बत की तरह है, आपको पता भी नहीं चलेगा कब हो गया!
    कोरोना मोहब्बत की तरह है, आपको पता भी नहीं चलेगा कब हो गया!
  • स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नियत हो तो इंसान बहुत कुछ सीख सकता है!
    स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नियत हो तो इंसान बहुत कुछ सीख सकता है!
  • बचपन की यादें:<br/>
बचपन में पेन की रिफिल खरीदकर लाते थे!<br/>
पहली बार थोड़ी से काटकर पेन में डालते थे, जब ज्यादा कट जाती थी, पीछे कागज़ डालते थे!
    बचपन की यादें:
    बचपन में पेन की रिफिल खरीदकर लाते थे!
    पहली बार थोड़ी से काटकर पेन में डालते थे, जब ज्यादा कट जाती थी, पीछे कागज़ डालते थे!
  • कदर और वक्त भी कमाल के होते हैं!<br/>
जिसकी कदर करो वो वक्त नहीं देता और जिसको वक्त दो, वो कदर नहीं करता!
    कदर और वक्त भी कमाल के होते हैं!
    जिसकी कदर करो वो वक्त नहीं देता और जिसको वक्त दो, वो कदर नहीं करता!
  • इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा: तुम्हारा नाम क्या है?<br/>
हरियाणवी: विजय दीनानाथ चौहान!<br/>
इंटरव्यू लेने वाला: लेकिन फॉर्म में तो तुमने अपना नाम रामफल लिखा है?<br/>
हरियाणवी: फेर क्यों सुआद ले है?
    इंटरव्यू लेने वाले ने पूछा: तुम्हारा नाम क्या है?
    हरियाणवी: विजय दीनानाथ चौहान!
    इंटरव्यू लेने वाला: लेकिन फॉर्म में तो तुमने अपना नाम रामफल लिखा है?
    हरियाणवी: फेर क्यों सुआद ले है?
  • एक लड़की नये टाइट जूते पहन कर मुश्किल से चल पा रही थी।<br/>
एक बुढ़िया ने उसे देख कर पूछा, `छोरी नये जूते खरीद के लाई के?`<br/>
लड़की हरियाणे की थी। वो हरियाणवी ही क्या जो सीधा जवाब दे। लड़की बोली, `ना ताई पेड़ से तोड़े हैं।`<br/>
ताई भी हरियाणवी थी। जवाब दिया, `छोरी, जल्दी कर दी। पकने देती तो तेरे नाप के हो जाते।`
    एक लड़की नये टाइट जूते पहन कर मुश्किल से चल पा रही थी।
    एक बुढ़िया ने उसे देख कर पूछा, "छोरी नये जूते खरीद के लाई के?"
    लड़की हरियाणे की थी। वो हरियाणवी ही क्या जो सीधा जवाब दे। लड़की बोली, "ना ताई पेड़ से तोड़े हैं।"
    ताई भी हरियाणवी थी। जवाब दिया, "छोरी, जल्दी कर दी। पकने देती तो तेरे नाप के हो जाते।"
  • इस दुनिया का कोई `रंग` नहीं, कोई `ढंग` नहीं!<br/>
पैसा पास हैं तो सब कुछ हैं, वरना कोई `संग` नहीं!
    इस दुनिया का कोई "रंग" नहीं, कोई "ढंग" नहीं!
    पैसा पास हैं तो सब कुछ हैं, वरना कोई "संग" नहीं!