• माटी का संसार है, खेल सके तो खेल;<br/>
बाज़ी उस रब के हाथ है, पूरा विज्ञान फेल!
    माटी का संसार है, खेल सके तो खेल;
    बाज़ी उस रब के हाथ है, पूरा विज्ञान फेल!
  • कुदरत का अजब खेल तो देखिये;<br/>
हवा शुद्ध है और चेहरे ढके हुए!
    कुदरत का अजब खेल तो देखिये;
    हवा शुद्ध है और चेहरे ढके हुए!
  • यदि आप सही हैं तो आप को गुस्सा होने की ज़रूरत नहीं है और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नहीं है!
    यदि आप सही हैं तो आप को गुस्सा होने की ज़रूरत नहीं है और यदि आप गलत हैं तो आपको गुस्सा होने का कोई हक़ नहीं है!
  • तीन रिश्ते वक्त आने पर पहचाने जाते हैं!<br/>

औलाद बुढापे में<br/>

दोस्त मुसीबत में<br/>
पत्नी लॉकडाउन में!
    तीन रिश्ते वक्त आने पर पहचाने जाते हैं!
    औलाद बुढापे में
    दोस्त मुसीबत में
    पत्नी लॉकडाउन में!
  • पूरी ज़िन्दगी कमा कर यदि हम 20 दिन का जुगाड़ नहीं कर पाए तो 20 दिन कमा कर क्या लेंगे?<br/>
सरकार का सहयोग करें, घर रहें, सुरक्षित रहें!
    पूरी ज़िन्दगी कमा कर यदि हम 20 दिन का जुगाड़ नहीं कर पाए तो 20 दिन कमा कर क्या लेंगे?
    सरकार का सहयोग करें, घर रहें, सुरक्षित रहें!
  • कोरोना की वजह से कुछ शब्द इस ब्रह्माण्ड से ही गायब हो गए जैसे:<br/>
कहाँ हो?<br/>
घर कब आओगे?
    कोरोना की वजह से कुछ शब्द इस ब्रह्माण्ड से ही गायब हो गए जैसे:
    कहाँ हो?
    घर कब आओगे?
  • ना इलाज है ना दवाई है;<br/>
ऐ इश्क़ तेरे टक्कर की बला आयी है!
    ना इलाज है ना दवाई है;
    ऐ इश्क़ तेरे टक्कर की बला आयी है!
  • न दिन पता चल रहा है, न रात<br/>
न रविवार, न सोमवार, न मार्च, न अप्रैल!<br/>
इन सब से अब मैं ऊपर उठ गया हूँ!<br/>
हे प्रभु, क्या मुझे मोक्ष प्राप्त हो गया है?
    न दिन पता चल रहा है, न रात
    न रविवार, न सोमवार, न मार्च, न अप्रैल!
    इन सब से अब मैं ऊपर उठ गया हूँ!
    हे प्रभु, क्या मुझे मोक्ष प्राप्त हो गया है?
  • कुछ सिखाकर ये दौर भी गुजर जायेगा;<br/>
फिर एक बार हर इंसान मुस्कुराएगा!<br/>
मायूस न होना मेरे दोस्तों इस बुरे वक़्त से;<br/>
कल, आज है... और आज, कल हो जाएगा।
    कुछ सिखाकर ये दौर भी गुजर जायेगा;
    फिर एक बार हर इंसान मुस्कुराएगा!
    मायूस न होना मेरे दोस्तों इस बुरे वक़्त से;
    कल, आज है... और आज, कल हो जाएगा।
  • समय-समय की बात है,<br/>
कभी घर पर पड़े रहने वाले को 'निकम्मा' कहा जाता था और आज 'समझदार'!
    समय-समय की बात है,
    कभी घर पर पड़े रहने वाले को 'निकम्मा' कहा जाता था और आज 'समझदार'!