• इंसान बुरा उस वक्त बनता है, जब वो खुद को दूसरों से अच्छा मानने लगता है!<br/>
सुप्रभात!
    इंसान बुरा उस वक्त बनता है, जब वो खुद को दूसरों से अच्छा मानने लगता है!
    सुप्रभात!
  • चेहरा आपका खिला रहे गुलाब की तरह,<br/>
नाम आपका रौशन रहे आफताब की तरह,<br/>
दुख में भी आप मुस्कुराते रहना फूलों की तरह,<br/>
अगर हम कभी तुम्हारा साथ ना दे पाए,<br/>
तो भी अपना जन्मदिन मनाते रहना इसी तरह!<br/>
जन्मदिन की शुभ कामनायें!
    चेहरा आपका खिला रहे गुलाब की तरह,
    नाम आपका रौशन रहे आफताब की तरह,
    दुख में भी आप मुस्कुराते रहना फूलों की तरह,
    अगर हम कभी तुम्हारा साथ ना दे पाए,
    तो भी अपना जन्मदिन मनाते रहना इसी तरह!
    जन्मदिन की शुभ कामनायें!
  • रिशता चाहे कोई भी हो, पासवर्ड एक ही है, `विश्वास`!<br/>
सुप्रभात!
    रिशता चाहे कोई भी हो, पासवर्ड एक ही है, "विश्वास"!
    सुप्रभात!
  • बहुत कुछ ऐसा था जो जीवन की भाग-दौड़ में छोड़ दिया;<br/>
फिर मालूम हुआ कि जो छोड़ा था, वो ही जीवन था।<br/>
सुप्रभात!
    बहुत कुछ ऐसा था जो जीवन की भाग-दौड़ में छोड़ दिया;
    फिर मालूम हुआ कि जो छोड़ा था, वो ही जीवन था।
    सुप्रभात!
  • कितना भी ज्ञानियों के पास बैठ लो तजुर्बा बेवक़ूफ़ होने के बाद ही मिलता है!<br/>
सुप्रभात!
    कितना भी ज्ञानियों के पास बैठ लो तजुर्बा बेवक़ूफ़ होने के बाद ही मिलता है!
    सुप्रभात!
  • यदि मेहनत आदत बन जाये तो कामयाबी `मुकद्दर` बन जाती है!<br/>
सुप्रभात!
    यदि मेहनत आदत बन जाये तो कामयाबी "मुकद्दर" बन जाती है!
    सुप्रभात!
  • इंसान ख़ुद की नज़र में साफ़ होना चाहिए बाक़ी दुनिया तो भगवान से भी दुखी है!<br/>
सुप्रभात!
    इंसान ख़ुद की नज़र में साफ़ होना चाहिए बाक़ी दुनिया तो भगवान से भी दुखी है!
    सुप्रभात!
  • मोह में हम बुराइयाँ नहीं देख पाते और घृणा में हम अच्छाइयाँ नहीं देख पाते!<br/>
सुप्रभात!
    मोह में हम बुराइयाँ नहीं देख पाते और घृणा में हम अच्छाइयाँ नहीं देख पाते!
    सुप्रभात!
  • शब्दों का और सोच का ही अहम किरदार होता है!<br/>
कभी हम समझ नहीं पाते हैं और कभी समझा नहीं पाते हैं!<br/>
सुप्रभात!
    शब्दों का और सोच का ही अहम किरदार होता है!
    कभी हम समझ नहीं पाते हैं और कभी समझा नहीं पाते हैं!
    सुप्रभात!
  • हे प्रभु ना मैंने तुझे देखा, ना कभी हम मिले,<br/>
फिर ऐसा क्या रिश्ता है, दर्द कोई भी हो, याद तेरी ही आती है!<br/>
सुप्रभात!
    हे प्रभु ना मैंने तुझे देखा, ना कभी हम मिले,
    फिर ऐसा क्या रिश्ता है, दर्द कोई भी हो, याद तेरी ही आती है!
    सुप्रभात!