• जीवन में कभी समझौता करना पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि झुकता वही है जिसमें जान होती है!<br/>
अकड़ तो मुरदे की पहचान होती है।<br/>
सुप्रभात!
    जीवन में कभी समझौता करना पड़े तो कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि झुकता वही है जिसमें जान होती है!
    अकड़ तो मुरदे की पहचान होती है।
    सुप्रभात!
  • दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;<br/>
सतगुरु के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया;<br/>
दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे सतगुरु का;<br/>
मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।<br/>
सुप्रभात!
    दौलत छोड़ी दुनिया छोड़ी सारा खज़ाना छोड़ दिया;
    सतगुरु के प्यार में दीवानों ने राज घराना छोड़ दिया;
    दरवाज़े पे जब लिखा हमने नाम हमारे सतगुरु का;
    मुसीबत ने दरवाज़े पे आना छोड़ दिया।
    सुप्रभात!
  • नसीहत वो सत्य है, जिसे कोई ग़ौर से नहीं सुनता और तारीफ वह धोखा है जिसे सब पूरे ध्यान से सुनते हैं।<br/>
सुप्रभात!
    नसीहत वो सत्य है, जिसे कोई ग़ौर से नहीं सुनता और तारीफ वह धोखा है जिसे सब पूरे ध्यान से सुनते हैं।
    सुप्रभात!
  • 'अनुमान' गलत हो सकता है लेकिन 'अनुभव' कंभी गलत नहीं होता! क्योंकि 'अनुमान' हमारे मन की 'कल्पना' है और 'अनुभव' हमारे जीवन की 'सीख' है!<br/>
सुप्रभात!
    'अनुमान' गलत हो सकता है लेकिन 'अनुभव' कंभी गलत नहीं होता! क्योंकि 'अनुमान' हमारे मन की 'कल्पना' है और 'अनुभव' हमारे जीवन की 'सीख' है!
    सुप्रभात!
  • हर तमन्ना पूरी करने के सपने हर शख्स सजाता है!<br/>
लेकिन मजबूत इरादे वाला ही उन्हें पूरे कर पाता हैं!<br/>
सुप्रभात!
    हर तमन्ना पूरी करने के सपने हर शख्स सजाता है!
    लेकिन मजबूत इरादे वाला ही उन्हें पूरे कर पाता हैं!
    सुप्रभात!
  • ज़िंदगी की हर सुबह कुछ शर्तें लेकर आती है और ज़िंदगी की हर शाम कुछ तज़ुर्बे देकर जाती है।<br/>
सुप्रभात!
    ज़िंदगी की हर सुबह कुछ शर्तें लेकर आती है और ज़िंदगी की हर शाम कुछ तज़ुर्बे देकर जाती है।
    सुप्रभात!
  • सोशल डिस्टेंस भले ही रख लो टॉकिंग डिस्टेंस कभी मत रखना!<br/>
क्योंकि ज़िन्दगी के सफर में गुज़र जाते हैं जो मुकाम वो फिर नहीं आते!<br/>
सुप्रभात!
    सोशल डिस्टेंस भले ही रख लो टॉकिंग डिस्टेंस कभी मत रखना!
    क्योंकि ज़िन्दगी के सफर में गुज़र जाते हैं जो मुकाम वो फिर नहीं आते!
    सुप्रभात!
  • बंधी हैं हाथ पर सबके घड़ियाँ मगर,<br/>
पकड़ में किसी के एक लम्हा भी नहीं!<br/>
सुप्रभात!
    बंधी हैं हाथ पर सबके घड़ियाँ मगर,
    पकड़ में किसी के एक लम्हा भी नहीं!
    सुप्रभात!
  • अगर ये तय है कि जो दिया है, वो लौट के आएगा तो...<br/>
क्यों ना सिर्फ दुआएं ही दी जाएं!<br/>
सुप्रभात!
    अगर ये तय है कि जो दिया है, वो लौट के आएगा तो...
    क्यों ना सिर्फ दुआएं ही दी जाएं!
    सुप्रभात!
  • कोई ना कोई, तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे!<br/>
सुप्रभात!
    कोई ना कोई, तलाश उसकी रखो, जो अन्धेरों में भी साथ दे!
    सुप्रभात!