• वो बोली,<br/>
`नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!`<br/>
हमने मुस्कुरा के कहा, `आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!`
    वो बोली,
    "नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!"
    हमने मुस्कुरा के कहा, "आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!"
  • अर्ज़ किया है:<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,<br/>
लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
    अर्ज़ किया है:
    खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,
    खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,
    लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
  • अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;<br/>
बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
    अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;
    बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
  • तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;<br/>
चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
    तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;
    चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
  • फिर पलट रही हैं सर्दी की सुहानी शामें,<br/>
फिर उनकी याद में मुठ मारनें के ज़माने आ गये!
    फिर पलट रही हैं सर्दी की सुहानी शामें,
    फिर उनकी याद में मुठ मारनें के ज़माने आ गये!
  • जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,<br/>
मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।
    जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,
    मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।
  • उसकी मोहब्बत पर कैसे शक करूँ यारों,<br/>
वो अपनी शादी का कार्ड देने आई थी और देके गयी!
    उसकी मोहब्बत पर कैसे शक करूँ यारों,
    वो अपनी शादी का कार्ड देने आई थी और देके गयी!
  • सर्दियों के लिए विशेष:<br/>
चूत मारने का मज़ा भी तभी आता है ग़ालिब,<br/>
जब, मौसम हो जाड़े का और भोसड़ा हो भाड़े का।
    सर्दियों के लिए विशेष:
    चूत मारने का मज़ा भी तभी आता है ग़ालिब,
    जब, मौसम हो जाड़े का और भोसड़ा हो भाड़े का।
  • अर्ज़ किया है:<br/>
उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;<br/>
लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
    अर्ज़ किया है:
    उसने होंठों से छू कर लौड़े पे नशा कर दिया;
    लंड की बात तो और थी यारो उसने तो झांटों को भी खड़ा कर दिया।
  • मदहोश मत करो खुद को किसी का हुस्न देख कर;<br/>
मोहब्बत अगर चेहरे से होती तो खुद़ा  'छेद' ना बनाता!
    मदहोश मत करो खुद को किसी का हुस्न देख कर;
    मोहब्बत अगर चेहरे से होती तो खुद़ा 'छेद' ना बनाता!