• थोड़ा हवस भी लाजमी है इश्क़ में साहब;<br/>
वरना शुद्ध इश्क को वो मर्दाना कमजोरी समझेगी!
    थोड़ा हवस भी लाजमी है इश्क़ में साहब;
    वरना शुद्ध इश्क को वो मर्दाना कमजोरी समझेगी!
  • इश्क मोहब्बत क्या है मुझे नहीं मालूम,<br/>
बस उसकी याद आती है और खडा हो जाता है!
    इश्क मोहब्बत क्या है मुझे नहीं मालूम,
    बस उसकी याद आती है और खडा हो जाता है!
  • उसे कभी गलत ना कहना ऐ दोस्तों,<br/>
वो बेवफा जरूर थी पर देती रोज थी!
    उसे कभी गलत ना कहना ऐ दोस्तों,
    वो बेवफा जरूर थी पर देती रोज थी!
  • तेरी कमर के नीचे का जो  हिस्सा है;<br/>
उसी का तो सारा किस्सा है!
    तेरी कमर के नीचे का जो हिस्सा है;
    उसी का तो सारा किस्सा है!
  • वो बोली,<br/>
`नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!`<br/>
हमने मुस्कुरा के कहा, `आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!`
    वो बोली,
    "नकाब में भी पहचान लेते हो हज़ारों में हमें खड़े-खड़े!"
    हमने मुस्कुरा के कहा, "आपके हैं ही इतने बड़े-बड़े!"
  • अर्ज़ किया है:<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,<br/>
खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,<br/>
लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
    अर्ज़ किया है:
    खुदा बचाये हमें इन हसीनों से,
    खुदा बचाये हमें इन हसीनो से,
    लेकिन इन हसीनों को कौन बचाये, हम जैसे कमीनो से।
  • अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;<br/>
बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
    अपने उसूल मुझे कल यूँ भी तोड़ने पड़े;
    बात चूत की थी इसलिए मुझे हाथ जोड़ने पड़े!
  • तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;<br/>
चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
    तीर क्यों चलाती हो, जब धार है तलवार में;
    चुचे क्यों दिखाती हो, जब माल है सलवार में।
  • फिर पलट रही हैं सर्दी की सुहानी शामें,<br/>
फिर उनकी याद में मुठ मारनें के ज़माने आ गये!
    फिर पलट रही हैं सर्दी की सुहानी शामें,
    फिर उनकी याद में मुठ मारनें के ज़माने आ गये!
  • जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,<br/>
मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।
    जब से हुआ है तेरी चूत का दीदार,
    मेरा लंड ऐसे खडा है जैसे चीन की दीवार।