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घर वाले मुझे हर रोज़ सुबह ऐसे उठाते हैं जैसे...<br/>
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तीसरा विश्वयुद्ध शुरु हो गया है और मैं ही आखिरी सैनिक बचा हूँ।
घर वाले मुझे हर रोज़ सुबह ऐसे उठाते हैं जैसे...
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तीसरा विश्वयुद्ध शुरु हो गया है और मैं ही आखिरी सैनिक बचा हूँ।
वक़्त की कदर उस शख्स से पूछो, जो शौचालय के बाहर खड़ा हो और उसे लूज मोशन हो और अंदर वाले को कब्ज़!
वक़्त की कदर उस शख्स से पूछो, जो शौचालय के बाहर खड़ा हो और उसे लूज मोशन हो और अंदर वाले को कब्ज़!
लगता है इन्द्र भगवान ने भी Jio का सिम ले लिया है,<br/>
रोज़ 1 GB बरस रहे हैं और वो भी 4G की स्पीड से।
लगता है इन्द्र भगवान ने भी Jio का सिम ले लिया है,
रोज़ 1 GB बरस रहे हैं और वो भी 4G की स्पीड से।
जिधर देखो इश्क़ के बीमार बैठे हैं;<br/>
हज़ारों मर गये लाखों तैयार बैठे हैं;<br/>
साले बर्बाद होते हैं लड़कियों के पीछे,<br/>
और कहते हैं कि सरकार की वजह से बेरोज़गार बैठे हैं!
जिधर देखो इश्क़ के बीमार बैठे हैं;
हज़ारों मर गये लाखों तैयार बैठे हैं;
साले बर्बाद होते हैं लड़कियों के पीछे,
और कहते हैं कि सरकार की वजह से बेरोज़गार बैठे हैं!
कोई बताएगा कि हवाई जहाज़ कितना एवरेज देता है।<br/>
एक लेना था यार,कौन-सा अच्छा रहेगा।
कोई बताएगा कि हवाई जहाज़ कितना एवरेज देता है।
एक लेना था यार,कौन-सा अच्छा रहेगा।
हो रही है मेरे खिलाफ साज़िश मेरी बरबादी की,<br/>
कर रहे हैं घरवाले बात मेरी शादी की।
हो रही है मेरे खिलाफ साज़िश मेरी बरबादी की,
कर रहे हैं घरवाले बात मेरी शादी की।
पता नहीं आजकल के बच्चे इतना कैसे पढ़ लेते हैं, साला हमें तो सात-आठ साल तक तो यही समझ नहीं आया कि 'सरोजनी नायडू' आदमी था कि औरत।
पता नहीं आजकल के बच्चे इतना कैसे पढ़ लेते हैं, साला हमें तो सात-आठ साल तक तो यही समझ नहीं आया कि "सरोजनी नायडू" आदमी था कि औरत।
1990 में लड़कियां डरती थी कि उन्हें सास कैसे मिलेगी?<br/>
2017 में आज कल होने वाली सास डरती है कि उन्हें बहू कैसी मिलेगी।
1990 में लड़कियां डरती थी कि उन्हें सास कैसे मिलेगी?
2017 में आज कल होने वाली सास डरती है कि उन्हें बहू कैसी मिलेगी।
मौत का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए जानू - मानू - बेबी - सोना वाले मैसेज डिलीट करके सोना।
मौत का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए जानू - मानू - बेबी - सोना वाले मैसेज डिलीट करके सोना।
ज़िंदगी में भले एक गर्लफ्रेंड तक ना हो फिर भी...<br/>
जगजीत सिंह की ग़ज़लें सुनने बैठो तो लगता है जैसे 10-12 छोड़ के चली गयी हों।
ज़िंदगी में भले एक गर्लफ्रेंड तक ना हो फिर भी...
जगजीत सिंह की ग़ज़लें सुनने बैठो तो लगता है जैसे 10-12 छोड़ के चली गयी हों।