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रिश्ते काँच की तरह होते हैं;<br/>
टूटे जाए तो चुभते हैं;<br/>
इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;<br/>
क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;<br/>
और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।
रिश्ते काँच की तरह होते हैं;
टूटे जाए तो चुभते हैं;
इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;
क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;
और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।
स्वार्थ से रिश्ते बनाने की कितनी भी कोशिश करो यह बनेगा नहीं,<br/>
और प्यार से बने रिश्ते को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करो यह टूटेगा नहीं।
स्वार्थ से रिश्ते बनाने की कितनी भी कोशिश करो यह बनेगा नहीं,
और प्यार से बने रिश्ते को तोड़ने की कितनी भी कोशिश करो यह टूटेगा नहीं।
जीवन में ज़ख़्म बड़े नहीं होते, उनको भरने वाले बड़े होते हैं;<br/>
रिश्ते बड़े नहीं होते लेकिन उनको निभाने वाले लोग बड़े होते हैं।
जीवन में ज़ख़्म बड़े नहीं होते, उनको भरने वाले बड़े होते हैं;
रिश्ते बड़े नहीं होते लेकिन उनको निभाने वाले लोग बड़े होते हैं।
हर रिश्ते में मिलावट देखी;<br/>
कच्चे रंगों की सजावट देखी;<br/>
लेकिन सालों-साल देखा है माँ को;<br/>
उसके चेहरे पे ना कभी थकावट देखी;<br/>
ना ममता में कभी कोई मिलावट देखी।
हर रिश्ते में मिलावट देखी;
कच्चे रंगों की सजावट देखी;
लेकिन सालों-साल देखा है माँ को;
उसके चेहरे पे ना कभी थकावट देखी;
ना ममता में कभी कोई मिलावट देखी।
कोशिश करो कि कोई तुम से ना रूठे;<br/>
ज़िंदगी में अपनों का कभी साथ ना छूटे;<br/>
रिश्ता कोई भी हो उसे ऐसे निभाओ;<br/>
कि उस रिश्ते की डोर ज़िंदगी भर ना टूटे।
कोशिश करो कि कोई तुम से ना रूठे;
ज़िंदगी में अपनों का कभी साथ ना छूटे;
रिश्ता कोई भी हो उसे ऐसे निभाओ;
कि उस रिश्ते की डोर ज़िंदगी भर ना टूटे।
रिश्ते और पौधे दोनों एक जैसे होते हैं;<br/>
लगाकर भूल जाओ तो दोनों ही सूख जाते हैं।
रिश्ते और पौधे दोनों एक जैसे होते हैं;
लगाकर भूल जाओ तो दोनों ही सूख जाते हैं।
यादें अक्सर होती हैं सताने के लिए;<br/>
कोई रूठ जाता है फिर मान जाने के लिए;<br/>
रिश्ते निभाना कोई मुश्किल तो नहीं;<br/>
बस दिलों में प्यार चाहिए उन्हें निभाने के लिए।
यादें अक्सर होती हैं सताने के लिए;
कोई रूठ जाता है फिर मान जाने के लिए;
रिश्ते निभाना कोई मुश्किल तो नहीं;
बस दिलों में प्यार चाहिए उन्हें निभाने के लिए।
छोटी सी बात पे लोग रूठ जाते हैं;<br/>
हाथ उनसे अनजाने में छूट जाते हैं;<br/>
कहते हैं बड़ा नाज़ुक है अपनेपन का यह रिश्ता;<br/>
इसमें हँसते-हँसते भी दिल टूट जाते हैं।
छोटी सी बात पे लोग रूठ जाते हैं;
हाथ उनसे अनजाने में छूट जाते हैं;
कहते हैं बड़ा नाज़ुक है अपनेपन का यह रिश्ता;
इसमें हँसते-हँसते भी दिल टूट जाते हैं।
रिश्तों की ही दुनिया में अक्सर ऐसा होता है;<br/>
दिल से इन्हें निभाने वाला ही अक्सर रोता है;<br/>
झुकना पड़े तो झुक जाना अपनों के लिए;<br/>
क्योंकि हर रिश्ता एक नाज़ुक समझौता होता है।
रिश्तों की ही दुनिया में अक्सर ऐसा होता है;
दिल से इन्हें निभाने वाला ही अक्सर रोता है;
झुकना पड़े तो झुक जाना अपनों के लिए;
क्योंकि हर रिश्ता एक नाज़ुक समझौता होता है।
रिश्तों का विश्वास टूट ना जाये;<br/>
दोस्ती का साथ कभी छूट ना जाये;<br/>
ऐ खुदा गलती करने से पहले संभाल लेना मुझे;<br/>
कहीं मेरी गलती से मेरा कोई अपना रूठ ना जाये।
रिश्तों का विश्वास टूट ना जाये;
दोस्ती का साथ कभी छूट ना जाये;
ऐ खुदा गलती करने से पहले संभाल लेना मुझे;
कहीं मेरी गलती से मेरा कोई अपना रूठ ना जाये।