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खामोश चेहरे पर हज़ारों पहरे होते हैं; 
हँसती आँखों में भी ज़ख़्म गहरे होते हैं; 
जिनसे अक्सर रूठ जाते हैं हम; 
असल में उनसे ही तो रिश्ते और गहरे होते हैं।
खामोश चेहरे पर हज़ारों पहरे होते हैं;
हँसती आँखों में भी ज़ख़्म गहरे होते हैं;
जिनसे अक्सर रूठ जाते हैं हम;
असल में उनसे ही तो रिश्ते और गहरे होते हैं।
साथ रहते-रहते यूँ ही वक़्त गुजर जायेगा; 
दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा; 
जी ले ये पल जब हम साथ हैं; 
कल का क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।
साथ रहते-रहते यूँ ही वक़्त गुजर जायेगा;
दूर होने के बाद कौन किसे याद आएगा;
जी ले ये पल जब हम साथ हैं;
कल का क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।
रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं; 
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं; 
और कभी रास्ते पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं।
रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलू हैं;
कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं;
और कभी रास्ते पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं।
कुछ मीठे पल याद आते हैं; 
पलकों पर आँसू छोड़ जाते हैं; 
कल कोई और मिल जाये तो हमें न भूलना; 
क्योंकि कुछ रिश्ते उम्र भर काम आते हैं।
कुछ मीठे पल याद आते हैं;
पलकों पर आँसू छोड़ जाते हैं;
कल कोई और मिल जाये तो हमें न भूलना;
क्योंकि कुछ रिश्ते उम्र भर काम आते हैं।
ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर; 
रखना थोड़ा भरोसा हम पर; 
हम निभाएंगे प्यार का यह रिश्ता इस कदर; 
कि भुलाने पर भी ना भुला पाओगे हमें ज़िंदगी भर।
ना छुपाना कोई बात दिल में हो अगर;
रखना थोड़ा भरोसा हम पर;
हम निभाएंगे प्यार का यह रिश्ता इस कदर;
कि भुलाने पर भी ना भुला पाओगे हमें ज़िंदगी भर।
दूर हो जाने से रिश्ते नहीं टूटते; 
न ही सिर्फ पास रहने से जुड़ते हैं; 
ये तो दिलों के बंधन हैं इसलिए; 
हम तुम्हें और तुम हमें नहीं भूलते।
दूर हो जाने से रिश्ते नहीं टूटते;
न ही सिर्फ पास रहने से जुड़ते हैं;
ये तो दिलों के बंधन हैं इसलिए;
हम तुम्हें और तुम हमें नहीं भूलते।
कोई टूटे तो उसे बनाना सीखो; 
कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो; 
रिश्ते तो मिलते हैं मुक़द्दर से बस; 
उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो।
कोई टूटे तो उसे बनाना सीखो;
कोई रूठे तो उसे मनाना सीखो;
रिश्ते तो मिलते हैं मुक़द्दर से बस;
उन्हें ख़ूबसूरती से निभाना सीखो।
यहाँ कौन किसका रकीब होता है; 
कौन किसका हबीब होता है; 
बन जाते हैं रिश्ते इस दुनिया में; 
जहाँ जहाँ जिसका नसीब होता है।
यहाँ कौन किसका रकीब होता है;
कौन किसका हबीब होता है;
बन जाते हैं रिश्ते इस दुनिया में;
जहाँ जहाँ जिसका नसीब होता है।
दौलत की भूख ऐसी थी कि कमाने निकल गए; 
दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए; 
बच्चों के साथ रहने की फुर्सत ना मिल सकी; 
और जब फुर्सत मिली तो बच्चे खुद ही दौलत कमाने निकल गए।
दौलत की भूख ऐसी थी कि कमाने निकल गए;
दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए;
बच्चों के साथ रहने की फुर्सत ना मिल सकी;
और जब फुर्सत मिली तो बच्चे खुद ही दौलत कमाने निकल गए।
रिश्ते काँच की तरह होते हैं;<br/>
टूटे जाए तो चुभते हैं;<br/>
इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;<br/>
क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;<br/>
और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।
रिश्ते काँच की तरह होते हैं;
टूटे जाए तो चुभते हैं;
इन्हे संभालकर हथेली पर सजाना;
क्योंकि इन्हें टूटने मे एक पल;
और बनाने मे बरसो लग जाते हैं।