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तेरी मोहब्बत में साँवरे एक बात सीखी है,<br/>
तेरी भक्ति के बिना ये सारी दुनिया फीकी है,<br/>
तेरा दर ढूंढ़ते - ढूंढ़ते ज़िन्दगी की शाम हो गयी,<br/>
जब तेरा दर देखा मेरे साँवरे तो ज़िंदगी ही तेरे नाम हो गयी।<br/>
बोलो राधे राधे!
तेरी मोहब्बत में साँवरे एक बात सीखी है,
तेरी भक्ति के बिना ये सारी दुनिया फीकी है,
तेरा दर ढूंढ़ते - ढूंढ़ते ज़िन्दगी की शाम हो गयी,
जब तेरा दर देखा मेरे साँवरे तो ज़िंदगी ही तेरे नाम हो गयी।
बोलो राधे राधे!
सतगुरु हैं तो बसंत है;<br/>
सतगुरु नहीं तो बस अंत है।
सतगुरु हैं तो बसंत है;
सतगुरु नहीं तो बस अंत है।
आँधियों से न बुझूं ऐसा उजाला हो जाऊँ;<br/>
तू नवाज़े तो जुगनू से सितारा हो जाऊँ;<br/>
एक बून्द हूँ मुझे ऐसी फितरत दे मेरे मालिक;<br/>
कोई प्यासा दिखे तो दरिया हो जाऊँ।
आँधियों से न बुझूं ऐसा उजाला हो जाऊँ;
तू नवाज़े तो जुगनू से सितारा हो जाऊँ;
एक बून्द हूँ मुझे ऐसी फितरत दे मेरे मालिक;
कोई प्यासा दिखे तो दरिया हो जाऊँ।
उम्र और ज़िंदगी में फर्क बस इतना है जो गुरु बिन बीती वो उम्र,<br/>
जो गुरु के साथ बीती वो ज़िंदगी।
उम्र और ज़िंदगी में फर्क बस इतना है जो गुरु बिन बीती वो उम्र,
जो गुरु के साथ बीती वो ज़िंदगी।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोये।<br/>
जो मन खोजा आपना, तो मुझसे बुरा न कोये।।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोये।
जो मन खोजा आपना, तो मुझसे बुरा न कोये।।
भीगने का अगर शौक हो तो आकर वाहेगुरू के चरणों में बैठ जाना,<br/>
ये बादल तो कभी कभी बरसते हैं, मगर मेरे वाहेगुरू की कृपा हर पल बरसती है।
भीगने का अगर शौक हो तो आकर वाहेगुरू के चरणों में बैठ जाना,
ये बादल तो कभी कभी बरसते हैं, मगर मेरे वाहेगुरू की कृपा हर पल बरसती है।
हे मेरे दाता हम अगर वो न कर सके जो आप चाहते हैं,<br/>
तो कम से कम हमें इतनी समझ ज़रूर देना,<br/>
कि हम वो तो कतई न करें जो आप कभी नहीं चाहते हैं।
हे मेरे दाता हम अगर वो न कर सके जो आप चाहते हैं,
तो कम से कम हमें इतनी समझ ज़रूर देना,
कि हम वो तो कतई न करें जो आप कभी नहीं चाहते हैं।
धनगुरु नानक रखी लाज,<br/>
किसी दे ना होविये मोहताज़,<br/>
सानु बस तेरी ही आस,<br/>
सतगुरु रखना चरना दे पास।
धनगुरु नानक रखी लाज,
किसी दे ना होविये मोहताज़,
सानु बस तेरी ही आस,
सतगुरु रखना चरना दे पास।
इंसान मायूस इसलिए होता है क्योंकि वह परमात्मा को राज़ी करने की बजाये लोगों को राज़ी करने में लगा रहता है।<br/>
वह भूल जाता है कि रब राज़ी तो सब राज़ी।
इंसान मायूस इसलिए होता है क्योंकि वह परमात्मा को राज़ी करने की बजाये लोगों को राज़ी करने में लगा रहता है।
वह भूल जाता है कि रब राज़ी तो सब राज़ी।
साधू कहावन कठिन है, लम्बा पेड़ खजूर। <br/>
चढ़े तो चखे प्रेम रस, गिरे तो चकनाचूर।<br/>
~Sant  Kabir Das
साधू कहावन कठिन है, लम्बा पेड़ खजूर।
चढ़े तो चखे प्रेम रस, गिरे तो चकनाचूर।
~Sant Kabir Das