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महक दोस्ती की इश्क़ से कम नहीं होती; 
इश्क़ से ज़िन्दगी खत्म नहीं होती; 
अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्तों का; 
तो ज़िन्दगी ज़न्नत से कम नहीं होती।
महक दोस्ती की इश्क़ से कम नहीं होती;
इश्क़ से ज़िन्दगी खत्म नहीं होती;
अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्तों का;
तो ज़िन्दगी ज़न्नत से कम नहीं होती।
आपकी दोस्ती पे नाज़ है हमें; 
कल था जितना भरोसा उतना ही आज है हमें; 
दोस्त वो नहीं जो ख़ुशी में साथ दे; 
दोस्त वही जो हर पल अपनेपन का एहसास दे।
आपकी दोस्ती पे नाज़ है हमें;
कल था जितना भरोसा उतना ही आज है हमें;
दोस्त वो नहीं जो ख़ुशी में साथ दे;
दोस्त वही जो हर पल अपनेपन का एहसास दे।
होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते; 
जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते; 
दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द; 
कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते।
होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते;
जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते;
दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द;
कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते।
दोस्ती होती नहीं, भूल जाने के लिए; 
दोस्त मिलते नहीं, बिखर जाने के लिए;
दोस्ती करके खुश रहोगे इतना; 
की वक़्त ही नहीं मिलेगा, आंसू बहाने के लिए।
दोस्ती होती नहीं, भूल जाने के लिए;
दोस्त मिलते नहीं, बिखर जाने के लिए; दोस्ती करके खुश रहोगे इतना;
की वक़्त ही नहीं मिलेगा, आंसू बहाने के लिए।
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है, 
दोस्ती कभी बड़ी नहीं होती, निभाने वाले हमेशा बड़े होते हैं।
इतिहास के हर पन्ने पर लिखा है,
दोस्ती कभी बड़ी नहीं होती, निभाने वाले हमेशा बड़े होते हैं।
गुण मिलने पर शादी होती है; 
और अवगुण मिलने पर दोस्ती! 
दोस्ती मुबारक!
गुण मिलने पर शादी होती है;
और अवगुण मिलने पर दोस्ती!
दोस्ती मुबारक!
मेरी सल्तनत में देख कर कदम रखना; 
मेरी दोस्ती की क़ैद में जमानत नहीं होती।
मेरी सल्तनत में देख कर कदम रखना;
मेरी दोस्ती की क़ैद में जमानत नहीं होती।
दोस्ती कोई खोज नहीं होती; 
दोस्ती हर किसी से हर रोज़ नहीं होती; 
अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह मत समझना; 
क्योंकि पलकें आँखों पर कभी बोझ नहीं होती।
दोस्ती कोई खोज नहीं होती;
दोस्ती हर किसी से हर रोज़ नहीं होती;
अपनी जिंदगी में हमारी मौजूदगी को बेवजह मत समझना;
क्योंकि पलकें आँखों पर कभी बोझ नहीं होती।
कितनी नन्ही से परिभाषा है दोस्ती की; 
मैं शब्द... 
तुम अर्थ... 
तुम बिन मैं व्यर्थ।
कितनी नन्ही से परिभाषा है दोस्ती की;
मैं शब्द...
तुम अर्थ...
तुम बिन मैं व्यर्थ।
यकीन पे यकीन दिलाते हैं दोस्त;  
राह चलते को बेवकूफ बनाते हैं दोस्त;  
शरबत बोल कर दारू पिलाते हैं दोस्त;  
पर कुछ भी कहो साले बहुत याद आते हैं दोस्त।
यकीन पे यकीन दिलाते हैं दोस्त;
राह चलते को बेवकूफ बनाते हैं दोस्त;
शरबत बोल कर दारू पिलाते हैं दोस्त;
पर कुछ भी कहो साले बहुत याद आते हैं दोस्त।