Hindi SMS (Page 11)

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जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बैठाओ;
रोने का टाइम कहां, सिर्फ मुस्कुराओ;
चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा;
बस याद रखना "जिंदगी ना मिलेगी दोबारा"।
जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से बैठाओ; 
रोने का टाइम कहां, सिर्फ मुस्कुराओ; 
चाहे ये दुनिया कहे पागल आवारा; 
बस याद रखना 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा'।
बड़ा होने ले लिए लोग अक्सर छोटे हो जाते हैं।
नया दिन;
नई सुबह;
नया आसमान;
नई उम्मीदे;
नई आशाएं;
नए सपने;
नये काम;
नई कामयाबी;
नई सफलता
के साथ आपको हमारी ओर से सुप्रभात।
नया दिन; 
नई सुबह; 
नया आसमान; 
नई उम्मीदे; 
नई आशाएं; 
नए सपने; 
नये काम; 
नई कामयाबी; 
नई सफलता 
के साथ आपको हमारी ओर से सुप्रभात।
जीतो बच्चे की पोटी चेक करवाने गई।
डॉक्टर बोला, "ये पोटी नहीं, हलवा है"।
जीतो: हे भगवान, डॉक्टर साहब एक फोन कर लूं?
डॉक्टर: क्यों?
जीतो: उनको बताना है कि पोटी उनके टिफ़िन में चली गई है।
संता अपनी बीवी के ऑफिस में गया तो उसने देखा कि वह अपने बॉस की गोद में बैठी है।
संता: चल जीतो, घर चल। ऐसी जगह काम नही करना जहां स्टाफ के बैठने के लिए कुर्सी भी न हो।
याद रख कर मेरी दोस्ती को तुमने;
मेरी ज़िंदगी पर एक एहसान कर दिया।
इस मोबाइल में यह आखरी रुपया था;
देखो हमने वो भी तेरे नाम कर दिया।
याद रख कर मेरी दोस्ती को तुमने; 
मेरी ज़िंदगी पर एक एहसान कर दिया। 
इस मोबाइल में यह आखरी रुपया था; 
देखो हमने वो भी तेरे नाम कर दिया।
स्वर्णिम अक्षर:
क्या आपको मालूम है कि ज़िन्दगी में सब से ज्यादा दुःख कब होता है?
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जब 'पाद' कोई और मारे और इलज़ाम आप पर लग जाए।
एक लड़का और एक लड़की एक दूसरे को क्यों नहीं समझते?
क्योंकि खुदा ने लड़कों को दिमाग दिया है और लड़कियों को अच्छा दिल।
लेकिन लड़के दिल से सोचते हैं और लड़कियां दिमाग से।
भीगी पलकों के संग मुस्कुराते हैं;
पल-पल दिल को कुछ और बहलाते हैं हम;
तू दूर है हमसे तो क्या हुआ मेरे दिलबर;
हर सांस में तेरी आहट को पाते हैं हम।
भीगी पलकों के संग मुस्कुराते हैं; 
पल-पल दिल को कुछ और बहलाते हैं हम; 
तू दूर है हमसे तो क्या हुआ मेरे दिलबर; 
हर सांस में तेरी आहट को पाते हैं हम।
जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है;
थोड़ा रुलाती है थोड़ा हसाती है;
खुद से ज्यादा किसी पे भरोसा मत करना;
क्योंकि अँधेरे में तो परछाईं भी साथ छोड़ जाती है।
जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है; 
थोड़ा रुलाती है थोड़ा हसाती है; 
खुद से ज्यादा किसी पे भरोसा मत करना; 
क्योंकि अँधेरे में तो परछाईं भी साथ छोड़ जाती है।