शादी लॉटरी जैसी होती है,
बहुत कम लोगों की "लगती है";
बाकी लोगों की "लग जाती" है।
लाल रंग की चुनरी से सजा माँ का दरबार, हर्षित हुआ संसार; 
नन्हें नन्हें कदमों से माँ आये आपके द्वार; 
मुबारक हो आपको नवरात्री का त्यौहार। 
शुभ नवरात्री!
लाल रंग की चुनरी से सजा माँ का दरबार, हर्षित हुआ संसार;
नन्हें नन्हें कदमों से माँ आये आपके द्वार;
मुबारक हो आपको नवरात्री का त्यौहार।
शुभ नवरात्री!
महक दोस्ती की इश्क़ से कम नहीं होती; 
इश्क़ से ज़िन्दगी खत्म नहीं होती; 
अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्तों का; 
तो ज़िन्दगी ज़न्नत से कम नहीं होती।
महक दोस्ती की इश्क़ से कम नहीं होती;
इश्क़ से ज़िन्दगी खत्म नहीं होती;
अगर साथ हो ज़िन्दगी में अच्छे दोस्तों का;
तो ज़िन्दगी ज़न्नत से कम नहीं होती।
ज़िन्दगी के उसूल भी 'कबड्डी' के खेल की तरह हैं, 
जैसे ही 'सफलता' की लाइन को छूते हैं लोग लग जाते हैं पीछे खींचने में।
ज़िन्दगी के उसूल भी "कबड्डी" के खेल की तरह हैं,
जैसे ही "सफलता" की लाइन को छूते हैं लोग लग जाते हैं पीछे खींचने में।
ज़िन्दगी उसी को आजमाती है; 
जो हर मोड़ पर चलना जानता है; 
कुछ खोकर तो हर कोई मुस्कुराता है; 
पर ज़िन्दगी उसी की है जो कुछ खोकर भी मुस्कुराना जानता है।
ज़िन्दगी उसी को आजमाती है;
जो हर मोड़ पर चलना जानता है;
कुछ खोकर तो हर कोई मुस्कुराता है;
पर ज़िन्दगी उसी की है जो कुछ खोकर भी मुस्कुराना जानता है।
झूठ बेवजह दलील देता है सच खुद अपना वकील होता है।
झूठ बेवजह दलील देता है सच खुद अपना वकील होता है।
आज का ज्ञान: 
पढाई और जिम 'कल' से शुरू होती है। 
सिगरेट और दारू भी 'कल' ही छोड़ी जाती है।
आज का ज्ञान:
पढाई और जिम 'कल' से शुरू होती है।
सिगरेट और दारू भी 'कल' ही छोड़ी जाती है।
संता किसी नेता के भाषण समारोह में गया। 
नेता: यह धरती मेरी माँ है। 
संता खड़ा हुआ और बोला, 'तो अपनी माँ को संभाल कर रखो। यह सूरज के इर्द-गिर्द चक्कर लगाती रहती है।
संता किसी नेता के भाषण समारोह में गया।
नेता: यह धरती मेरी माँ है।
संता खड़ा हुआ और बोला, "तो अपनी माँ को संभाल कर रखो। यह सूरज के इर्द-गिर्द चक्कर लगाती रहती है।
अरुण लाल की कमेंट्री: 
'और ये चौका....बचा लिया' 
'और छक्का...हो सकता था पर कैच आउट हो गए' 
'बहुत ही अच्छा शॉट, लेकिन आउट' 
'बेहतरीन फील्डिंग हो सकती थी मगर कैच छोड़ा'
अरुण लाल की कमेंट्री:
'और ये चौका....बचा लिया'
'और छक्का...हो सकता था पर कैच आउट हो गए'
'बहुत ही अच्छा शॉट, लेकिन आउट'
'बेहतरीन फील्डिंग हो सकती थी मगर कैच छोड़ा'
आज के जमाने में सत्संग उसी संत का बढ़िया रहता है जिसके पंडाल में गर्म पकोड़े, जलेबी और अदरक वाली चाय मिले। 
वरना ज्ञान तो अब Whatsapp पर भी बंटता है।
आज के जमाने में सत्संग उसी संत का बढ़िया रहता है जिसके पंडाल में गर्म पकोड़े, जलेबी और अदरक वाली चाय मिले।
वरना ज्ञान तो अब Whatsapp पर भी बंटता है।