स्त्री की तारीफ कीजिए उसमें कोई शक नहीं है,<br/>
क्योंकि वह खुद का घर छोड़कर आती है पर कभी पुरुष के लिए भी दो शब्द बोला करो जो अंजान स्त्री को खुद का घर सौंप देता है।
स्त्री की तारीफ कीजिए उसमें कोई शक नहीं है,
क्योंकि वह खुद का घर छोड़कर आती है पर कभी पुरुष के लिए भी दो शब्द बोला करो जो अंजान स्त्री को खुद का घर सौंप देता है।
गुमनामी की जिंदगी जीना चाहता हूँ, बस एक बार...<br/>
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लोन पास हो जाए।
गुमनामी की जिंदगी जीना चाहता हूँ, बस एक बार...
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लोन पास हो जाए।
बचना ऐ हसीनों,<br/>
लो 'MAY' आ गया।
बचना ऐ हसीनों,
लो "MAY" आ गया।
भारतीय महिलायें भी अजीब होती हैं,<br/>
दोपहर में पड़ोसन से पति की बुराई करती हैं और शाम को पति से पड़ोसन की।
भारतीय महिलायें भी अजीब होती हैं,
दोपहर में पड़ोसन से पति की बुराई करती हैं और शाम को पति से पड़ोसन की।
घर में जो सबसे छोटे होते हैं, उनकी आधी ज़िंदगी,<br/>
दरवाज़ा खोलने, बंद करने, पानी पिलाने और रिश्तेदार को स्टेशन छोड़ने में ही निकल जाती हैं।
घर में जो सबसे छोटे होते हैं, उनकी आधी ज़िंदगी,
दरवाज़ा खोलने, बंद करने, पानी पिलाने और रिश्तेदार को स्टेशन छोड़ने में ही निकल जाती हैं।
एक कार के पीछे लिखी सुंदर लाइन...<br/>
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देख के ओवरटेक करें, गाड़ी में लठ भी पड़े हैं।
एक कार के पीछे लिखी सुंदर लाइन...
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देख के ओवरटेक करें, गाड़ी में लठ भी पड़े हैं।
कैसे सोऊं सुकून की नींद में साहब,<br/>
सुकून से सुलाने वालों के तो शव आ रहें हैं।<br/>
शहीदों को सलाम!
कैसे सोऊं सुकून की नींद में साहब,
सुकून से सुलाने वालों के तो शव आ रहें हैं।
शहीदों को सलाम!
लडका: पंडित जी, मेरी शादी नहीं हो रही है। कोई उपाय बताओ।<br/>
पंडित जी: सबसे पहले, बड़ों से 'सदा सुखी रहो' के आशीर्वाद लेना बंद करो।
लडका: पंडित जी, मेरी शादी नहीं हो रही है। कोई उपाय बताओ।
पंडित जी: सबसे पहले, बड़ों से 'सदा सुखी रहो' के आशीर्वाद लेना बंद करो।
एक दोस्त ने पूछा, 'क्या है, परिवर्तन की परिभाषा?'<br/>
गालिब: 'जो कभी बादलों की गरज से डर कर, लिपट जाती थी मुझसे; आज वह खुद बादलों से भी ज्यादा गरजती है।'
एक दोस्त ने पूछा, "क्या है, परिवर्तन की परिभाषा?"
गालिब: "जो कभी बादलों की गरज से डर कर, लिपट जाती थी मुझसे; आज वह खुद बादलों से भी ज्यादा गरजती है।"
बचपन में डराया जाता था कि मेंढक को पत्थर मारोगे तो गूंगी पत्नी मिलेगी।<br/>
कितना डरते थे तब... अब लगता है काश मार ही दिया होता।
बचपन में डराया जाता था कि मेंढक को पत्थर मारोगे तो गूंगी पत्नी मिलेगी।
कितना डरते थे तब... अब लगता है काश मार ही दिया होता।