• कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख;<br/>
तू भी तो कभौ मुझको मनाने के लिये आ!<br/><br/>

पिंदार-ए-मोहब्बत : प्यार का अभिमान<br/>
भरम: भ्रम
    कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत का भरम रख;
    तू भी तो कभौ मुझको मनाने के लिये आ!

    पिंदार-ए-मोहब्बत : प्यार का अभिमान
    भरम: भ्रम
    ~ Ahmad Faraz
  • मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुयी दहलीज़ पर मैं;<br/>
कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला!<br/><br/>

मुंतज़िर: इंतज़ार<br/>
दहलीज़: दहरी
    मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुयी दहलीज़ पर मैं;
    कौन आयेगा यहाँ कौन है आनेवाला!

    मुंतज़िर: इंतज़ार
    दहलीज़: दहरी
    ~ Ahmad Faraz
  • इक उम्र से हूँ लज़्जत-ए-गिरिया से महरूम;<br/>
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को मनाने के लिये आ!<br/><br/>
लज़्ज़त-ए-गिरिया: रोने के सुख<br/>
महरूम: वंचित<br/>
राहत-ए-जाँ: जो जान को सुख दे, प्रियेसी
    इक उम्र से हूँ लज़्जत-ए-गिरिया से महरूम;
    ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को मनाने के लिये आ!

    लज़्ज़त-ए-गिरिया: रोने के सुख
    महरूम: वंचित
    राहत-ए-जाँ: जो जान को सुख दे, प्रियेसी
    ~ Ahmad Faraz
  • हम भी मजबूरियों का उज़्र करें;<br/>
फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ!
    हम भी मजबूरियों का उज़्र करें;
    फिर कहीं और मुब्तला हो जाएँ!
    ~ Ahmad Faraz
  • सौ बार मरना चाहा निगाहों में डूब कर 'फ़राज़';<br/>
वो निगाह झुका लेते हैं हमें मरने नहीं देते।
    सौ बार मरना चाहा निगाहों में डूब कर 'फ़राज़';
    वो निगाह झुका लेते हैं हमें मरने नहीं देते।
    ~ Ahmad Faraz
  • ज़िन्दगी तो अपने क़दमों पे चलती है 'फ़राज़';<br/>
औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।
    ज़िन्दगी तो अपने क़दमों पे चलती है 'फ़राज़';
    औरों के सहारे तो जनाज़े उठा करते हैं।
    ~ Ahmad Faraz
  • दोस्ती अपनी भी असर रखती है फ़राज़;<br/>
बहुत याद आएँगे ज़रा भूल कर तो देखो।
    दोस्ती अपनी भी असर रखती है फ़राज़;
    बहुत याद आएँगे ज़रा भूल कर तो देखो।
    ~ Ahmad Faraz
  • इतनी सी बात पे दिल की धड़कन रुक गई `फ़राज़`;<br/>
एक पल जो तसव्वुर किया तेरे बिना जीने का।
    इतनी सी बात पे दिल की धड़कन रुक गई `फ़राज़`;
    एक पल जो तसव्वुर किया तेरे बिना जीने का।
    ~ Ahmad Faraz
  • अब उसे रोज़ न सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़;<br/>
उमर गुजरी है उस की याद का नशा किये हुए।
    अब उसे रोज़ न सोचूँ तो बदन टूटता है फ़राज़;
    उमर गुजरी है उस की याद का नशा किये हुए।
    ~ Ahmad Faraz
  • तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़;<br/>
एक नज़र हम को भी देख लो कि तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।
    तुम्हारी एक निगाह से कतल होते हैं लोग फ़राज़;
    एक नज़र हम को भी देख लो कि तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।
    ~ Ahmad Faraz