• किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;<br/>
तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।<br/><br/>

शब-ए-वस्ल  =   मिलन की रात
    किस नाज़ से कहते हैं वो झुंजला के शब-ए-वस्ल;
    तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।

    शब-ए-वस्ल = मिलन की रात
    ~ Akbar Allahabadi
  • खींचो न कमानों को न तलवार निकालो;<br/>
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।
    खींचो न कमानों को न तलवार निकालो;
    जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।
    ~ Akbar Allahabadi
  • कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी;<br/>
खुलता नहीं हाल उन की तबियत का ज़रा भी।
    कुछ तर्ज़-ए-सितम भी है कुछ अंदाज़-ए-वफ़ा भी;
    खुलता नहीं हाल उन की तबियत का ज़रा भी।
    ~ Akbar Allahabadi
  • जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;<br/>
हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|
    जो कहा मैंने कि प्यार आता है मुझ को तुम पर;
    हँस के कहने लगा और आप को आता क्या है|
    ~ Akbar Allahabadi
  • समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;<br/>
असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।<br/><br/>
Meaning:<br/>
फ़साहत  =  शुद्ध या अच्छी भाषा<br/>
बलाग़त  =  भाषण
    समझ में साफ़ आ जाए फ़साहत इस को कहते हैं;
    असर हो सुनने वाले पर बलाग़त इस को कहते हैं।

    Meaning:
    फ़साहत = शुद्ध या अच्छी भाषा
    बलाग़त = भाषण
    ~ Akbar Allahabadi
  • रहता है इबादत में हमें मौत का खटका;<br/>
हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।
    रहता है इबादत में हमें मौत का खटका;
    हम याद-ए-ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।
    ~ Akbar Allahabadi
  • हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम;<br/>
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
    हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम;
    वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
    ~ Akbar Allahabadi
  • अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से;<br/>
लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से।
    अकबर दबे नहीं किसी सुल्ताँ की फ़ौज से;
    लेकिन शहीद हो गए बीवी की नौज से।
    ~ Akbar Allahabadi
  • आह जो दिल से निकाली जाएगी;<br/>
क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी।
    आह जो दिल से निकाली जाएगी;
    क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी।
    ~ Akbar Allahabadi
  • अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा;<br/>
जब ख़ुदा का सामना होगा तो देखा जाएगा।
    अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा;
    जब ख़ुदा का सामना होगा तो देखा जाएगा।
    ~ Akbar Allahabadi