• आती नहीं सदाएं उनकी मेरे क़फ़स में,<br/>
होती मेरी रिहाई ऐ काश मेरे बस में;<br/>
क्या बदनसीब हूँ मैं घर को तरस रहा,<br/>
साथी तो है वतन में, मैं क़ैद में पड़ा हूँ!
    आती नहीं सदाएं उनकी मेरे क़फ़स में,
    होती मेरी रिहाई ऐ काश मेरे बस में;
    क्या बदनसीब हूँ मैं घर को तरस रहा,
    साथी तो है वतन में, मैं क़ैद में पड़ा हूँ!
    ~ Allama Iqbal
  • लगती है चोट दिल पर आता है याद जिस दम,<br/>
शबनम के आंसुओं पर कलियों का मुस्कराना;<br/>
वो प्यारी-प्यारी सूरत वो कामिनी-सी मूरत,<br/>
आबाद जिसके दम से था मेरा आशियाना!
    लगती है चोट दिल पर आता है याद जिस दम,
    शबनम के आंसुओं पर कलियों का मुस्कराना;
    वो प्यारी-प्यारी सूरत वो कामिनी-सी मूरत,
    आबाद जिसके दम से था मेरा आशियाना!
    ~ Allama Iqbal
  • आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना,<br/>
वो बाग की बहारें वो सब का चहचहाना;<br/>
आज़ादियां कहां वो सब अपने घोंसले की,<br/>
अपनी खुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना!
    आता है याद मुझको गुज़रा हुआ ज़माना,
    वो बाग की बहारें वो सब का चहचहाना;
    आज़ादियां कहां वो सब अपने घोंसले की,
    अपनी खुशी से आना अपनी ख़ुशी से जाना!
    ~ Allama Iqbal
  • इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में; <br/>
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर!
    इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में;
    या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर!
    ~ Allama Iqbal
  • खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तक़दीर से पहले;<br/>
ख़ुदा बन्दे से खुद पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है!
    खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तक़दीर से पहले;
    ख़ुदा बन्दे से खुद पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है!
    ~ Allama Iqbal
  • हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है;<br/>
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा!
    हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है;
    बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा!
    ~ Allama Iqbal
  • तेरे इश्क़ की इंतेहा चाहता हूँ;<br/>
मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ!
    तेरे इश्क़ की इंतेहा चाहता हूँ;
    मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ!
    ~ Allama Iqbal
  • अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    ~ Allama Iqbal
  • पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;<br/>
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;
    तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    ~ Allama Iqbal