• अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!
    ~ Allama Iqbal
  • पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;<br/>
तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात;
    तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा!
    ~ Allama Iqbal
  • देख कैसी क़यामत सी बरपा हुई है आशियानों पर इक़बाल;<br/>
जो लहू से तामीर हुए थे, पानी से बह गए!
    देख कैसी क़यामत सी बरपा हुई है आशियानों पर इक़बाल;
    जो लहू से तामीर हुए थे, पानी से बह गए!
    ~ Allama Iqbal
  • तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूं को तोड़ सकते हैं;<br/> 
ज़ुजाज की ये इमारत है संग-ए-ख़ारा नहीं!<br/> <br/>
    तिलिस्म-ए-गुंबद-ए-गर्दूं को तोड़ सकते हैं;
    ज़ुजाज की ये इमारत है संग-ए-ख़ारा नहीं!

    ~ Allama Iqbal
  • ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं;<br/>
तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं!
    ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं;
    तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं!
    ~ Allama Iqbal
  • है आशिक़ी में रस्म, अलग सब से बैठना;<br/>
बुत ख़ाना भी, हरम भी, कलीसा भी छोड़ दे!
    है आशिक़ी में रस्म, अलग सब से बैठना;
    बुत ख़ाना भी, हरम भी, कलीसा भी छोड़ दे!
    ~ Allama Iqbal
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!<br/><br/>
पासबान-ए-अक़्ल: बुद्धी का निरीक्षक, Guardian of the mind, Intution
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!

    पासबान-ए-अक़्ल: बुद्धी का निरीक्षक, Guardian of the mind, Intution
    ~ Allama Iqbal
  • अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;<br/>
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    अपने मन में डूब कर पा जा सु्राग़-ए-ज़िन्दगी;
    तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन!
    ~ Allama Iqbal
  • अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;<br/>
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!<br/><br/>

पासबान  =  चौकीदार, गार्ड
    अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल;
    लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे!

    पासबान = चौकीदार, गार्ड
    ~ Allama Iqbal