• कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा;
    वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा;
    वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गई;
    दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।
    ~ Amjad Islam Amjad
  • अपने घर की खिड़की से मैं आसमान को देखूँगा;
    जिस पर तेरा नाम लिखा है उस तारे को ढूँढूँगा;
    तुम भी हर शब दिया जला कर पलकों की दहलीज़ पर रखना;
    मैं भी रोज़ एक ख़्वाब तुम्हारे शहर की जानिब भेजूँगा।
    ~ Amjad Islam Amjad
  • कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा;
    वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा;
    वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं;
    दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।

    अनुवाद:
    दिल-ए-मुंतज़िर = इंतज़ार करने वाला दिल
    ~ Amjad Islam Amjad
  • कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा;
    वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा;
    वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गई;
    दिल-ए-मुंतज़िर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा।
    ~ Amjad Islam Amjad