• वह जो अपने सम्प्रदाय की महिमा बढाने के इरादे से उसका आदर करता है और दूसरों के संप्रदाय को नीचा दिखाता है, ऐसे कृत्यों से वह अपने ही सम्प्रदाय को गंभीर चोट पहुंचता है।
    वह जो अपने सम्प्रदाय की महिमा बढाने के इरादे से उसका आदर करता है और दूसरों के संप्रदाय को नीचा दिखाता है, ऐसे कृत्यों से वह अपने ही सम्प्रदाय को गंभीर चोट पहुंचता है।
    ~ Ashoka
  • चलिए हम सब सुनते हैं, और दूसरों के द्वारा बताये गए सिद्धांतों को सुनने के लिए तैयार रहते हैं।
    चलिए हम सब सुनते हैं, और दूसरों के द्वारा बताये गए सिद्धांतों को सुनने के लिए तैयार रहते हैं।
    ~ Ashoka
  • किसी को सिर्फ अपने धर्म का सम्मान और दूसरों के धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए।
    किसी को सिर्फ अपने धर्म का सम्मान और दूसरों के धर्म की निंदा नहीं करनी चाहिए।
    ~ Ashoka
  • दूसरे धर्मो की निंदा करना गलत है। सच्चा व्यक्ति वह है जो दूसरे धर्मो की भी हर उस बात का सम्मान करता है जो सम्मान के लायक है।
    दूसरे धर्मो की निंदा करना गलत है। सच्चा व्यक्ति वह है जो दूसरे धर्मो की भी हर उस बात का सम्मान करता है जो सम्मान के लायक है।
    ~ Ashoka
  • सबसे उत्तम विजय प्रेम की है, जो सदैव के लिए विजेताओं का हृदय बाँध लेती है।
    सबसे उत्तम विजय प्रेम की है, जो सदैव के लिए विजेताओं का हृदय बाँध लेती है।
    ~ Ashoka
  • दूसरे धर्मो की निंदा करना गलत है। सच्चा व्यक्ति वह है जो दूसरे धर्मो की भी हर उस बात का सम्मान करता है जो सम्मान के लायक है।
    ~ Ashoka
  • सबसे उत्तम विजय प्रेम की है जो सदैव के लिए विजेताओं का हृदय बाँध लेती है।
    सबसे उत्तम विजय प्रेम की है जो सदैव के लिए विजेताओं का हृदय बाँध लेती है।
    ~ Ashoka