• वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;<br/>
रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!Upload to Facebook
    वो इत्र-दान सा लहजा मेरे बुज़ुर्गों का;
    रची-बसी हुई उर्दू ज़बान की ख़ुश्बू!
    ~ Bashir Badr
  • हम भी दरिया हैं हमें, अपना हुनर मालूम है;<br/>
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।Upload to Facebook
    हम भी दरिया हैं हमें, अपना हुनर मालूम है;
    जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा।
    ~ Bashir Badr
  • कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;<br/>
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।Upload to Facebook
    कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;
    ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    ~ Bashir Badr
  • कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,<br/>
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।Upload to Facebook
    कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से,
    ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    ~ Bashir Badr
  • सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा;<br/>
इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जायेगा।Upload to Facebook
    सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा;
    इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जायेगा।
    ~ Bashir Badr
  • कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;<br/>
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।Upload to Facebook
    कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से;
    ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो।
    ~ Bashir Badr
  • हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं;<br/>
उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में।Upload to Facebook
    हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं;
    उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में।
    ~ Bashir Badr
  • लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;<br/>
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।Upload to Facebook
    लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;
    तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।
    ~ Bashir Badr
  • उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो;>br/>
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए। Upload to Facebook
    उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो;>br/> न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।
    ~ Bashir Badr
  • चरागों को आँखों में महफूज रखना;<br/>
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी;<br/>
मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी;<br/>
किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।Upload to Facebook
    चरागों को आँखों में महफूज रखना;
    बड़ी दूर तक रात ही रात होगी;
    मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी;
    किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।
    ~ Bashir Badr