• है इश्क़ की मंज़िल में हाल के जैसे;
    लुट जाए कहीं राह में सामान किसी का।
    ~ Bhaddurshah Zafar
  • ले गया छीन के कौन आज तेरा सब्र-ओ-करार;
    बेकरारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो ना थी।
    ~ Bhaddurshah Zafar